चेन्नई, 27 जून। तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। मरुमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एमडीएमके) की महासभा ने शनिवार को द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) के नेतृत्व वाले धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन से अलग होने का प्रस्ताव पारित कर दिया। पार्टी महासचिव वाइको की अध्यक्षता में हुई महासभा की बैठक में गठबंधन की वर्तमान स्थिति और भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई, जिसके बाद सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया।
इससे पहले शुक्रवार को एमडीएमके की उच्चस्तरीय समिति की बैठक आयोजित की गई थी। उसके बाद शनिवार को हुई महासभा में द्रमुक के साथ गठबंधन जारी रखने या उससे अलग होने के मुद्दे पर पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के विचार लिए गए। चर्चा के बाद पार्टी ने द्रमुक गठबंधन से अलग होने का औपचारिक प्रस्ताव पारित कर दिया।
महासभा में पारित प्रस्ताव में कहा गया कि एमडीएमके वर्ष 2017 से द्रमुक के नेतृत्व वाले धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन का हिस्सा रही है। पार्टी का कहना है कि उसने सांप्रदायिक राजनीति का विरोध करने और द्रविड़ आंदोलन की वैचारिक प्रतिबद्धताओं को मजबूत करने के उद्देश्य से इस गठबंधन में शामिल होने का निर्णय लिया था।
प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि वर्ष 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के दौरान गठबंधन के भीतर ऐसे प्रयास किए गए, जिनसे एमडीएमके की स्वतंत्र राजनीतिक पहचान और पिछले 32 वर्षों के संघर्षपूर्ण राजनीतिक योगदान को कमजोर करने की कोशिश हुई। पार्टी का कहना है कि इन परिस्थितियों के बावजूद उसने गठबंधन धर्म निभाते हुए चुनाव लड़ा।
एमडीएमके ने यह भी दावा किया कि चुनाव परिणाम आने के बाद राज्य की राजनीति में कुछ ऐसी गतिविधियां हुईं, जो जनता के जनादेश के अनुरूप नहीं थीं। प्रस्ताव में आरोप लगाया गया कि कुछ प्रभावशाली शक्तियों ने धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन की मूल वैचारिक भावना को कमजोर कर दिया, जिसके कारण गठबंधन में बने रहना पार्टी के लिए उचित नहीं रह गया।
महासभा ने यह भी स्पष्ट किया कि आगामी चुनावों में पार्टी किसके साथ गठबंधन करेगी, इस संबंध में समय आने पर अलग से निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन से अलग होने का फैसला ही लागू रहेगा।
बैठक के दौरान पार्टी के दो विधायक कडैयनल्लूर से राजेंद्रन और सीरकाझी से सेंथिल सेल्वन अनुपस्थित रहे। उनकी गैरमौजूदगी को लेकर राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। मीडिया में ऐसी अटकलें भी लगाई जा रही हैं कि दोनों विधायक अपने पद से इस्तीफा देने के पक्ष में नहीं हैं। हालांकि, इस संबंध में दोनों विधायकों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
गौरतलब है कि हालिया तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में एमडीएमके ने द्रमुक गठबंधन के तहत 'उदय सूरियन' (उगते सूरज) चुनाव चिह्न पर चार सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिनमें से कडैयनल्लूर और सीरकाझी विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी। अब गठबंधन से अलग होने के फैसले के बाद राज्य की राजनीति में नए राजनीतिक समीकरण बनने की संभावना तेज हो गई है।
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