मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल के रजिस्ट्रार मुकेश सिंह को नर्सिंग परीक्षाओं में गड़बड़ी और परीक्षा परिणामों में देरी के चलते उनके पद से हटा दिया गया है। उप मुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के निर्देश के बाद शुक्रवार को यह कार्रवाई की गई है।
दरअसल, नर्सिंग परीक्षाओं में लंबे समय से गड़बड़ी और परिणामों में देरी को लेकर छात्रों में नाराजगी बनी हुई थी। भोपाल स्थित नर्सिंग काउंसिल कार्यालय के बाहर छात्र पिछले पांच दिनों से लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। विभिन्न मांगों को लेकर नर्सिंग स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन (एनएसओ) के सदस्य सरकार और प्रशासन के खिलाफ विरोध दर्ज करा रहे थे। संगठन का आरोप है कि परीक्षाओं और परिणामों से जुड़ी प्रक्रियाओं में लगातार लापरवाही बरती जा रही है, जिससे हजारों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
प्रदर्शनकारी छात्रों की मांग है कि सभी जीएनएम विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम घोषित किए जाएं और आगामी परीक्षाएं आयोजित कराई जाएं। इसके अलावा बीएससी नर्सिंग छात्रों के परिणाम घोषित करने तथा परीक्षाएं कराने की मांग भी की जा रही है। प्रदर्शनकारी छात्रों ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी वर्ग तथा पैरामेडिकल छात्रों के लिए छात्रवृत्ति जारी करने की मांग की है। साथ ही ईडब्ल्यूएस और सामान्य वर्ग के छात्रों को भी छात्रवृत्ति का लाभ देने की मांग रखी गई है।
छात्रों ने नर्सिंग और पैरामेडिकल संस्थानों को जबलपुर स्थित मेडिकल यूनिवर्सिटी से जोड़ने तथा फैकल्टी मैनेजमेंट सिस्टम लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि इन सुधारों से शिक्षा व्यवस्था अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बन सकेगी। छात्रों का कहना है कि परीक्षा प्रबंधन में गड़बड़ी और रिजल्ट में लगातार देरी के कारण उन्हें मानसिक तनाव और करियर संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसी वजह से वे अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखे हुए हैं।
छात्रों के प्रदर्शन के प्रदर्शन को देखते हुए प्रदेश के उप मुख्यमंत्री और लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने सख्त रुख अपनाते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए। उनके निर्देश के बाद नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल के रजिस्ट्रार मुकेश सिंह को उनके पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। उनकी जगह डॉ. उपेंद्र धोते को काउंसिल के नए रजिस्ट्रार का प्रभार सौंपा गया है।
नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़ा मामले में एक दिन पहले ही 2,395 छात्रों को उच्च न्यायालय ने दी थी राहत
बहुचर्चित नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़ा मामले में उच्च न्यायालय की जबलपुर स्थित मुख्य खंडपीठ ने एक दिन पहले ही 2,395 प्रभावित छात्रों को बड़ी राहत दी थी। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की पीठ ने लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अधिवक्ता विशाल बघेल की जनहित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई करते हुए अनसूटेबल कॉलेजों से सूटेबल कॉलेजों में ट्रांसफर हुए छात्रों को आगामी परीक्षाओं में शामिल होने और उनके रुके हुए परिणाम जारी करने के निर्देश दिए थे।
सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने अदालत को बताया कि ट्रांसफर के लिए पात्र 4,475 पंजीकृत छात्रों में से 2,813 ने प्रक्रिया में हिस्सा लिया, जिनमें से 2,395 छात्रों का सफलतापूर्वक स्थानांतरण किया जा चुका है। अदालत ने इस रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लेते हुए छात्रों के हित में यह फैसला सुनाया था।







