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मां का अधूरा सपना, बेटे के पक्के घर से हुआ पूरा


छत्तीसगढ़ 20 September 2026
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मां का अधूरा सपना, बेटे के पक्के घर से हुआ पूरा

राजनांदगांव  सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से आम लोगों के जीवन में आए बदलाव की कहानियां समाज के लिए प्रेरणा बन रही हैं। विकासखंड डोंगरगढ़ के ग्राम पंचायत पारागांवखुर्द निवासी  संतुराम की कहानी भी ऐसी ही एक प्रेरक कहानी है, जहां प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण ने एक गरीब परिवार के जीवन में पक्की छत एवं सुरक्षा का सहारा दिया और वर्षों से अधूरे सपने को नई दिशा मिली।

 संतुराम ने बताया कि वे अपनी मां के साथ एक कच्चे और जर्जर मकान में रहते थे। दोनों मां-बेटे मजदूरी कर किसी तरह परिवार का जीवन-यापन करते थे। आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि अपने लिए पक्का मकान बनाना उनके लिए केवल एक सपना था। बरसात के दिनों में कच्ची दीवारों वाले घर में पानी भर जाता था और हर बारिश उनके लिए चिंता और परेशानी लेकर आती थी।  संतुराम बताते हैं कि उनकी मां का सपना था कि एक दिन उनका अपना पक्का मकान होगा। लेकिन पहले ही उनकी मां का निधन हो गया। मां के जाने के साथ ही पक्के घर का उनका सपना भी अधूरा रह गया। मां के निधन के बाद संतुराम अकेले ही जीवन गुजार रहे थे और पक्का मकान बनाने की उन्होंने उम्मीद लगभग छोड़ दी थी। इसी बीच ग्राम पंचायत के माध्यम से उन्हें जानकारी मिली कि आवास प्लस सूची में उनकी मां के नाम के साथ वे नामिनी के रूप में दर्ज हैं। उन्होंने शीघ्र ही आवश्यक दस्तावेज, बैंक खाते एवं आधार कार्ड की जानकारी उपलब्ध कराने के बाद उनका पंजीयन कराया गया। कुछ समय बाद जब उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास स्वीकृत होने की जानकारी मिली तो उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ। बैंक जाकर खाते की जानकारी लेने पर उन्हें पता चला कि पहली किस्त के रूप में 40 हजार रूपए उनके खाते में जमा हो चुके हैं। इसके बाद संतुराम ने अपने पक्के घर का निर्माण शुरू किया। योजना के तहत तीन किस्तों में कुल 1 लाख 20 हजार रूपए की सहायता राशि प्राप्त हुई। इसके साथ ही रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत 95 दिवस की मजदूरी का लाभ भी मिला। शासन से मिली सहायता ने  संतुराम के लिए पक्के घर का सपना साकार कर दिया।

आज संतुराम के सिर पर पक्की छत है। उन्होंने कहा कि उनकी मां का पक्के मकान में रहने का सपना उनके जीवनकाल में पूरा नहीं हो सका, लेकिन उनके निधन के बाद नामिनी के रूप में उन्हें आवास का लाभ मिला। मां की यादों से जुड़े इस घर को वे केवल एक मकान नहीं, बल्कि मां के अधूरे सपने की निशानी मानते हैं।  संतुराम कहते हैं कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनका भी अपना पक्का घर बन पाएगा। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण ने उनके जीवन में नई रोशनी लाई है। उन्होंने कहा कि उनकी मां का पक्के घर में रहने का सपना पूरा नहीं हो सका, लेकिन उनके बाद मुझे यह घर मिला। इसके लिए वे शासन और देश के प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी का हृदय से आभार व्यक्त किया।

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