मुंबई, 26 सितंबर । महाराष्ट्र सरकार ने शनिवार को सूबे के 265 तहसीलों को सूखा ग्रस्त घोषित किए जाने से संबंधित शासनादेश जारी किया है। जारी शासनादेश के अनुसार सूखाग्रस्त तहसीलों में किसानों के लिए बहुत जल्द आर्थिक मदद की घोषणा की जाएगी।
महाराष्ट्र के कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने शनिवार को पत्रकारों को बताया कि सर्वेक्षण के अनुसार राज्य में कुल 358 तहसील सूखा प्रभावित पाए गए थे। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने सूखा ग्रस्त इलाकों का हाल ही में दौरा किया था और किसानों से मिलकर सूखे की स्थिति को जानने का प्रयास किया था। इसी वजह आज मुख्यमंत्री फडणवीस ने 358 तहसीलों से 265 तहसीलों को आज सूखाग्रस्त घोषित किया है। इन इलाकों में ‘ट्रिगर-1’ (अर्थात सर्वात अधिकर सूखा )लागू किया गया है।
कृषि मंत्री ने कहा कि आज पहला चरण पूरा हुआ है। बहुत जल्द इन तहसीलों के लिए मदद की घोषणा चरणबद्ध तरीके से की जाएगी। उन्होंने बताया कि सूखे की गंभीर स्थिति को देखते हुए सरकार ने प्रशासन को फसल नुकसान का पंचनामा जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं। नुकसान के आकलन में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए फसलों की वास्तविक स्थिति की तस्वीरें और जीपीएस लोकेशन भी दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।
सूबे की 265 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित होने के बाद सूखा प्रभावित इलाकों में किसानों को जमीन के राजस्व से पूरी छूट दी जाएगी। इसके साथ ही स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों की परीक्षा फीस माफ करने का फैसला लिया गया है। सूखा प्रभावित किसानों से खेती से जुड़े ऋण की वसूली पर तत्काल रोक लगाई जाएगी। इसके अलावा, किसानों के फसल ऋण का पुनर्गठन यानी लोन रीस्ट्रक्चरिंग की जाएगी, ताकि उन्हें तत्काल वित्तीय दबाव से राहत मिल सके। साथ ही कृषि पंपों के मौजूदा बिजली बिल में किसानों को राहत दी जाएगी।
7.5 हॉर्सपावर तक के कृषि पंपों का बिजली बिल पहले से माफ है, जबकि अब इससे अधिक क्षमता वाले पंपों को भी बिजली बिल में छूट देने की व्यवस्था की जाएगी। सरकार ने सूखा प्रभावित गांवों में कृषि पंपों के बिजली कनेक्शन नहीं काटने के भी निर्देश दिए हैं। सूखा प्रभावित परिवारों को अधिक से अधिक रोजगार उपलब्ध कराने के लिए रोजगार गारंटी योजना के नियमों में आवश्यक ढील दी जाएगी।
इसके अलावा, खेती पर निर्भर किसानों और खेतिहर मजदूरों को अनाज उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी, ताकि सूखे के दौरान खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। जिन इलाकों में पीने के पानी की कमी होगी, वहां जरूरत के मुताबिक तत्काल पानी के टैंकर शुरू किए जाएंगे। पशुओं के लिए भी चारे और पानी की व्यवस्था की जाएगी।
इसके साथ ही सरकार की ओर से बड़े पैमाने पर जल संरक्षण और पानी बचाने वाले काम किए जाएंगे। सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को फसल नुकसान का पंचनामा जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं। राज्य सरकार के इन उपायों का उद्देश्य सूखा प्रभावित क्षेत्रों में किसानों, खेतिहर मजदूरों, विद्यार्थियों और ग्रामीण आबादी को तत्काल राहत देना है।







