पूर्व WTO महानिदेशक पास्कल लैमी ने कहा है कि वैश्विक व्यापार तेजी से बदल रहा है और विश्व व्यापार संगठन को भी समय के साथ अपने नियम और ढांचे में बदलाव करना होगा।
नई दिल्ली में आयोजित एक उच्च स्तरीय चर्चा में उन्होंने कहा कि पारंपरिक “प्रोटेक्शनिज्म” (संरक्षणवाद) की जगह अब “प्रिकॉशनिज्म” (सावधानी आधारित नीति) ले रहा है, जहां देश ज्यादा सख्त नियम और जोखिम प्रबंधन पर ध्यान दे रहे हैं।
यह कार्यक्रम Chintan Research Foundation और CUTS International द्वारा आयोजित किया गया था।
चर्चा की शुरुआत में प्रदीप एस. मेहता ने कहा कि WTO की हालिया बैठक (MC14) में कोई बड़ा फैसला नहीं हुआ, जिससे इसकी प्रासंगिकता पर सवाल उठ रहे हैं।
सत्र की अध्यक्षता करते हुए शशि थरूर ने कहा कि वैश्विक व्यापार इस समय एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है, जहां देशों के बीच भरोसा कम हो रहा है और भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहे हैं।
वहीं, अर्थशास्त्री मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने कहा कि WTO से हर समस्या का समाधान की उम्मीद नहीं की जा सकती और व्यापार नीतियों को व्यावहारिक बनाना जरूरी है।
शिशिर प्रियदर्शी ने कहा कि WTO अभी भी जरूरी संस्था है, लेकिन इसकी विश्वसनीयता कम हुई है, खासकर विवाद समाधान प्रणाली के कमजोर होने के कारण।
बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि WTO एक अहम मोड़ पर खड़ा है और अब उसे सुधार के जरिए खुद को मजबूत बनाना होगा, ताकि बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में उसकी भूमिका बनी रहे।







