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कृषि विभाग की योजना बनी वरदान, हिरादेवी साहू ने गांव में शुरू किया स्वरोजगार

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कृषि विभाग की योजना बनी वरदान, हिरादेवी साहू ने गांव में शुरू किया स्वरोजगार

धमतरी, 26 मई । मेहनत, लगन और सरकारी योजनाओं के सही उपयोग से ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर रही हैं। धमतरी जिले के ग्राम भोंठाडीह की हिरादेवी साहू ने इसे सच साबित कर दिखाया है। पारंपरिक खेती से परिवार का पालन-पोषण करने वाली हिरादेवी आज गांव में स्वरोजगार की नई पहचान बन चुकी हैं।

कृषि विभाग की सहायता से स्थापित मिनी राइस मिल ने न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत की है, बल्कि गांव और आसपास के किसानों को भी बड़ी राहत दी है। पहले हिरादेवी साहू को अपने खेत में उत्पादित धान की कुटाई के लिए दूर स्थित राइस मिलों पर निर्भर रहना पड़ता था। इससे समय और परिवहन पर अतिरिक्त खर्च होता था, वहीं कई बार धान की गुणवत्ता भी प्रभावित हो जाती थी। छोटे किसानों के लिए कम मात्रा में धान लेकर दूर जाना किसी परेशानी से कम नहीं था। ऐसे समय में कृषि विभाग की योजना उनके लिए नई उम्मीद बनकर सामने आई। वित्तीय वर्ष 2025-26 में कृषि विभाग के मार्गदर्शन और सहयोग से उन्होंने गांव में मिनी राइस मिल स्थापित की। इसके बाद अब खेत में तैयार धान का प्रसंस्करण गांव में ही होने लगा है। इससे समय की बचत के साथ परिवहन लागत भी कम हुई है और धान की गुणवत्ता बेहतर बनी हुई है।

स्थानीय स्तर पर त्वरित कुटाई होने से किसानों को बाजार में भी बेहतर मूल्य मिलने लगा है। हिरादेवी साहू ने अपनी सुविधा को केवल खुद तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने आसपास के किसानों के लिए भी अपनी मिनी राइस मिल के दरवाजे खोल दिए। अब ग्रामीण कम खर्च और कम समय में धान की कुटाई करा पा रहे हैं। इससे किसानों को राहत मिलने के साथ हिरादेवी के लिए अतिरिक्त आय का स्थायी स्रोत भी तैयार हो गया है। उनकी इस पहल से गांव में स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़े हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है।

हिरादेवी साहू का कहना है कि शासन की योजनाओं ने उन्हें आत्मविश्वास दिया और आगे बढ़ने की प्रेरणा प्रदान की। वे अन्य ग्रामीण महिलाओं को भी स्वरोजगार और कृषि आधारित उद्यम अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनकी सफलता यह साबित करती है कि योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचे और उसमें मेहनत का साथ मिले, तो गांवों में भी आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तिकरण की नई तस्वीर उभर सकती है। आज हिरादेवी साहू की मिनी राइस मिल केवल एक मशीन नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भर भारत की सोच का जीवंत प्रतीक बन चुकी है।

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