संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में भारत ने फिलिस्तीनी लोगों के प्रति अपना अटूट समर्थन दोहराया और दो-राष्ट्र समाधान (Two-State Solution) की वकालत की। भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने मंगलवार को मध्य पूर्व पर हुई खुली बहस के दौरान कहा कि भारत एक संप्रभु, स्वतंत्र और व्यवहार्य फिलिस्तीनी राष्ट्र की स्थापना के लिए प्रतिबद्ध है, जो इजराइल के साथ शांतिपूर्वक सह-अस्तित्व में रहे।
हरीश ने अरबी भाषा में संबोधन देते हुए कहा, “होर्मुज स्ट्रेट पर दुनिया का ध्यान गाजा पट्टी में गंभीर मानवीय संकट से नहीं भटकना चाहिए। आम लोगों की जान जाना और इंफ्रास्ट्रक्चर का नष्ट होना बहुत बड़ी चिंता है, जिस पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तुरंत और गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।”
यह पहला मौका था जब किसी भारतीय राजनयिक ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अरबी भाषा में संबोधन दिया। हरीश ने काहिरा की अमेरिकन यूनिवर्सिटी से अरबी भाषा सीखी है और पहले गाजा में भारत के प्रतिनिधि कार्यालय में तैनात रह चुके हैं।
भारत की मदद का आंकड़ा
हरीश ने बताया कि भारत ने फिलिस्तीन को अब तक लगभग 175 मिलियन डॉलर की मदद दी है, जिसमें विकास परियोजनाएं, मानवीय सहायता, फिलिस्तीनी इंस्टीट्यूट ऑफ डिप्लोमेसी का निर्माण और यूएनआरडब्ल्यूए को योगदान शामिल है।
इस महीने ब्रसेल्स में फिलिस्तीन डोनर ग्रुप की बैठक में भारत ने तीन बड़े प्रोजेक्ट्स का वादा किया है:
पी. हरीश ने कहा, “जब हम फिलिस्तीनी लोगों की मानवीय पीड़ा कम करने के साथ-साथ स्थायी राजनीतिक समाधान की दिशा में भी काम कर रहे हैं तो हमें एक सस्टेनेबल और टिकाऊ राजनीतिक समाधान के लिए भी आगे बढ़ना चाहिए।”
उन्होंने यह भी कहा कि ”भारत का मानना है कि सुरक्षित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर एक स्वतंत्र और व्यवहार्य फिलिस्तीनी राष्ट्र ही इस लंबे संघर्ष का टिकाऊ और स्थायी समाधान है।”







