Breaking News

सौर ऊर्जा से आत्मनिर्भरता तक, विकसित भारत की राह रोशन कर रहा नया ऊर्जा मॉडल


विज्ञान 10 August 2026
post

सौर ऊर्जा से आत्मनिर्भरता तक, विकसित भारत की राह रोशन कर रहा नया ऊर्जा मॉडल

भारत के स्वच्छ, सुरक्षित और आत्मनिर्भर ऊर्जा भविष्य की दिशा में बढ़ते कदम आज देश की विकास यात्रा की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल हो रहे हैं। पिछले एक दशक में सौर ऊर्जा बिजली क्षेत्र के अपेक्षाकृत छोटे हिस्से से आगे बढ़कर नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार के प्रमुख स्तंभों में शामिल हो गई है। यह बदलाव दिखाता है कि निरंतर नीतिगत समर्थन, बुनियादी ढांचे का विकास, तकनीकी नवाचार और जनभागीदारी मिलकर किसी पूरे क्षेत्र को किस तरह बदल सकते हैं।

प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना से नई उम्मीद

हाल ही में प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (PM-SSY) को मिली मंजूरी इस यात्रा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। 5,070 करोड़ रुपए के परिव्यय वाली इस योजना के तहत 5,000 मेगावाट क्षमता की फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक परियोजनाएं विकसित की जाएंगी। इनके साथ ऊर्जा भंडारण की व्यवस्था भी होगी। मौजूदा जलाशयों और उपयुक्त अंतर्देशीय जल निकायों का उपयोग करने से सीमित भूमि संसाधनों पर दबाव कम होगा और उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा। योजना से हर वर्ष करीब एक करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी और लगभग 16,000 से 17,000 पूर्णकालिक समकक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।

एक दशक में 3 गीगावाट से 162.15 गीगावाट तक पहुंची क्षमता

भारत के सौर ऊर्जा क्षेत्र में आए बदलाव की सबसे बड़ी विशेषता इसकी गति और व्यापकता है। प्रेस सूचना ब्यूरो के अनुसार, देश की स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता 2014 में करीब 3 गीगावाट थी, जो 30 जून 2026 तक बढ़कर 162.15 गीगावाट हो गई। वित्त वर्ष 2025-26 में ही भारत ने 44.61 गीगावाट सौर क्षमता जोड़ी, जो पिछले वित्त वर्ष में हुई वृद्धि से लगभग दोगुनी है। देश की कुल गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता भी 283.46 गीगावाट तक पहुंच गई है। ये आंकड़े दीर्घकालिक दृष्टि और निरंतर नीतिगत प्रयासों के प्रभाव को रेखांकित करते हैं।

सोलर पार्क और ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर से मजबूत हुआ ढांचा

मोदी सरकार की सौर ऊर्जा रणनीति केवल बड़े सौर ऊर्जा संयंत्रों के निर्माण तक सीमित नहीं रही है। सोलर पार्क योजना के माध्यम से बड़े पैमाने की परियोजनाओं के लिए भूमि और आवश्यक बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं, ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के जरिए अक्षय ऊर्जा से समृद्ध क्षेत्रों से बिजली की मांग वाले क्षेत्रों तक बिजली पहुंचाने के लिए ट्रांसमिशन नेटवर्क मजबूत किया जा रहा है। फरवरी 2026 तक देशभर में 54 सोलर पार्कों को मंजूरी दी जा चुकी थी, जिनकी संयुक्त स्वीकृत क्षमता 39,188 मेगावाट थी। राजस्थान का भड़ला, कर्नाटक का पावगड़ा और मध्य प्रदेश का रीवा सौर पार्क भारत की बढ़ती सौर क्षमता के प्रमुख उदाहरण बन चुके हैं।

सौर बिजली को किफायती बनाने पर जोर

सौर ऊर्जा को अधिक किफायती बनाने की दिशा में भी सरकार के प्रयास महत्वपूर्ण रहे हैं। प्रतिस्पर्धी बोली और पारदर्शी टैरिफ निर्धारण के कारण पिछले वर्षों में सौर बिजली की दरों में उल्लेखनीय कमी आई है। वर्ष 2017 में भड़ला सोलर पार्क की नीलामी में 2.44 रुपए प्रति यूनिट की रिकॉर्ड कम दर हासिल होना महत्वपूर्ण उपलब्धि थी। इससे यह संकेत मिला कि स्वच्छ ऊर्जा पर्यावरण के लिए लाभकारी होने के साथ आर्थिक रूप से भी प्रतिस्पर्धी हो सकती है।

घरेलू विनिर्माण को मिली नई ताकत

सरकार ने सौर ऊर्जा क्षेत्र में घरेलू विनिर्माण को भी प्राथमिकता दी है। उच्च दक्षता वाले सौर फोटोवोल्टिक मॉड्यूल के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन यानी पीएलआई योजना के माध्यम से भारत में मजबूत विनिर्माण तंत्र विकसित किया जा रहा है। इससे निवेश को बढ़ावा मिलने, रोजगार के अवसर पैदा होने और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल रही है। वहीं, मॉडल और निर्माताओं की स्वीकृत सूची यानी एएलएमएम व्यवस्था सौर उपकरणों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

घरों और खेतों तक पहुंची सौर ऊर्जा

भारत की सौर क्रांति का सबसे महत्वपूर्ण पहलू आम नागरिकों से इसका बढ़ता जुड़ाव है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के माध्यम से रूफटॉप सोलर को सीधे घरों तक पहुंचाया जा रहा है। वहीं, पीएम-कुसुम योजना के तहत किसानों को सौर पंप और सौर ऊर्जा आधारित फीडर जैसी सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है। इस तरह नवीकरणीय ऊर्जा अब केवल बड़ी बिजली कंपनियों या औद्योगिक परियोजनाओं तक सीमित नहीं है। घर, किसान, व्यवसाय और स्थानीय समुदाय भी देश के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन में सक्रिय भागीदार बन रहे हैं।

पंचामृत लक्ष्यों के साथ ऊर्जा सुरक्षा पर फोकस

यह दृष्टिकोण मोदी सरकार के व्यापक विकास दर्शन को भी दर्शाता है, जिसमें आर्थिक विकास के साथ पर्यावरणीय स्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता पर जोर दिया गया है। पंचामृत के तहत भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता हासिल करने और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है। मिशन लाइफ के माध्यम से भी जिम्मेदार उपभोग और नागरिक भागीदारी को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

सौर ऊर्जा से रोजगार और आत्मनिर्भरता को बल

भारत की सौर यात्रा केवल गीगावाट में क्षमता बढ़ाने की कहानी नहीं है। यह रोजगार सृजन, घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने, आयात पर निर्भरता घटाने, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने, बिजली को अधिक किफायती बनाने और वैश्विक जलवायु प्रयासों में योगदान देने की कहानी भी है। दुनिया के तेजी से बढ़ते सौर ऊर्जा बाजारों में भारत की मजबूत स्थिति देश की बढ़ती क्षमताओं और निरंतर नीतिगत प्रयासों को दर्शाती है।

स्वच्छ ऊर्जा और आर्थिक विकास का साथ

नरेंद्र मोदी सरकार की सौर ऊर्जा संबंधी पहल यह दिखाती है कि पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। महत्वाकांक्षी लक्ष्यों, नई योजनाओं, तकनीकी नवाचार और नागरिकों तथा उद्योगों की बढ़ती भागीदारी के साथ भारत एक ऐसी ऊर्जा व्यवस्था तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जो अधिक स्वच्छ, मजबूत, लचीली और आत्मनिर्भर हो।

विकसित भारत की राह को रोशन कर रही सौर शक्ति

सूर्य भारत के सबसे बड़े प्राकृतिक संसाधनों में से एक है। पिछले एक दशक की उपलब्धि यह है कि इस प्रचुर प्राकृतिक संसाधन को राष्ट्रीय विकास के एक शक्तिशाली साधन में बदलने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। विकसित भारत की ओर बढ़ते हुए भारत की यह सौर क्रांति न केवल घरों और उद्योगों को रोशन कर रही है, बल्कि देश के हरित, मजबूत और टिकाऊ भविष्य की राह भी प्रकाशित कर रही है।

You might also like!


RAIPUR WEATHER