रायपुर, 21 अगस्त उत्तराखंड के चमोली में हुए भीषण टनल हादसे में छत्तीसगढ़ के 4 मजदूरों की दर्दनाक मौत के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। मरने वालों में 4 मजदूर छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के निवासी थे।
टनल हादसे में छत्तीसगढ़ के लापता मजदूरों के शव पूरी तरह बरामद होने और उनकी पहचान पुख्ता होने के बाद, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बीती देर रात प्रभावित परिवारों के लिए इस आर्थिक मदद का आधिकारिक ऐलान किया। हादसे पर शोक व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री साय ने मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये एवं दो घायलों को इलाज के लिए 50-50 हजार रुपये देने के निर्देश दिए हैं।
मृतकों में छत्तीसगढ़ के लोकेश्वर ,भुवनेश्वर ,देवनाथ तथा चेतन पोयाम के शव रेस्क्यू ऑपरेशन के आखिरी दिन 18 अगस्त को बरामद हुआ है। ये सभी श्रमिक मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले और आसपास के बस्तर क्षेत्र के रहने वाले थे। इस हादसे में छत्तीसगढ़ के दो अन्य मजदूर सुनील दीवान (घायल)पेन सिंह (घायल) सुरक्षित बचाए गए थे, जिनका इलाज चल रहा है। इस टनल हादसे में कुल 10 मजदूरों की जान गई है और 12 को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया ।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार दुःख की इस घड़ी में शोकाकुल परिवारों के साथ पूरी संवेदनशीलता से खड़ी है और उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इस हादसे में कोंडागांव जिले के ग्राम धनसुली के 2, मदनार के 1 और दहीकोंगा के 1 श्रमिक की मृत्यु हुई है, जबकि जिले के 2 श्रमिक घायल हुए हैं। दिवंगत श्रमिकों के पार्थिव शरीर कोंडागांव लाए गए, जहां परिजनों की उपस्थिति में उनका अंतिम संस्कार किया गया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार दुःख की इस घड़ी में शोकाकुल परिवारों के साथ पूरी संवेदनशीलता से खड़ी है और उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
मुख्यमंत्री ने ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति एवं शोकाकुल परिजनों को इस असीम दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है। उन्होंने हादसे में घायल दोनों श्रमिकों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की भी कामना की है।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड के चमोली जिले में निर्माणाधीन मायापुर – पीपलकोटी टनल में 13 अगस्त की शाम लगभग 6:30 बजे भारी भूस्खलन और पहाड़ी के पानी के रिसाव के कारण 22 श्रमिक अंदर फंस गए। सूचना के तुरंत बाद रेस्क्यू अभियान चलाया गया, जिससे 12 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल भेजा गया। पहले दिन 4 श्रमिकों के शव मिले, जबकि अगले दिन तीन और शव बरामद हुए। 15 अगस्त को एक और 16 अगस्त को 2 शव मिले।







