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परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद का बलिदान दिवस, अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान को नमन


देश 10 September 2026
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परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद का बलिदान दिवस, अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान को नमन

1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के महानायक और परमवीर चक्र से सम्मानित वीर अब्दुल हमीद का बलिदान दिवस है। देशभर से उन्हें श्रद्धांजलि दी जा रही है। दरअसल,10 सितंबर को परमवीर चक्र विजेता कंपनी क्वार्टर मास्टर हवलदार अब्दुल हमीद ने 1965 भारत-पाक युद्ध के दौरान अदम्य साहस दिखाते हुए मातृभूमि के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्हें मरणोपरांत भारत का सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र प्रदान किया गया। 

जीवन परिचय

अब्दुल हमीद का जन्म 1 जुलाई 1933 को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के धामूपुर गांव में हुआ था। उनके पिता मोहम्मद उस्मान दर्जी का काम करते थे और अब्दुल हमीद भी परिवार के काम में हाथ बंटाते थे। दिसंबर 1954 में वे भारतीय सेना में भर्ती हुए और 4 ग्रेनेडियर्स में सेवा की। सेना में रहते हुए उन्होंने कठिन परिस्थितियों में अपनी जिम्मेदारी और साहस का परिचय दिया

दुश्मन के 8 टैंक नष्ट किए

प्राप्त जानकारी के अनुसार 1965 में पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ बड़े पैमाने पर टैंक इस्तेमाल किए। पंजाब के खेमकरण क्षेत्र में असल उत्तर की लड़ाई बेहद महत्वपूर्ण थी। ऐसे में अब्दुल हमीद के पास एक जीप पर लगी रिकॉयलेस गन थी। उन्होंने अत्यंत जोखिम उठाते हुए दुश्मन के भारी-भरकम पैटन टैंकों का मुकाबला किया। अब्दुल हमीद अपनी जान की परवाह किए बिना आगे बढ़े और कई पाकिस्तानी टैंकों को नष्ट किया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्होंने कुल 8 टैंक नष्ट किए और नौवें टैंक को निशाना बनाते समय वीरगति प्राप्त की।

अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान को नमन

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य समेत कई बड़े नेताओं ने उनके अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान को नमन किया।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अपने सोशल मीडिया एक्स पोस्ट में लिखा, “1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में अदम्य साहस और असाधारण युद्ध कौशल का परिचय देकर अपना जीवन न्योछावर कर देने वाले परमवीर चक्र से सम्मानित वीर अब्दुल हमीद के बलिदान दिवस पर कोटि-कोटि नमन। अपने साहस और सूझबूझ के साथ उन्होंने दुश्मन के कई टैंकों को ध्वस्त किया तथा विषम परिस्थिति में भी मोर्चे पर डटे रहे। युद्धभूमि में सर्वोच्च बलिदान देकर कंपनी क्वार्टर मास्टर हवलदार अब्दुल हमीद जी ने भारतीय सेना की गौरवशाली परंपरा को और समृद्ध किया। कृतज्ञ राष्ट्र उनके शौर्य और बलिदान को सदैव स्मरण करता रहेगा।”

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा, “1965 के भारत-पाक युद्ध में अपने अदम्य साहस, असाधारण पराक्रम और दृढ़ संकल्प से दुश्मनों के छक्के छुड़ाने वाले परमवीर चक्र से सम्मानित अमर शहीद वीर अब्दुल हमीद जी के बलिदान दिवस पर उन्हें कोटि-कोटि नमन! मातृभूमि की रक्षा के लिए उनका सर्वोच्च बलिदान और राष्ट्रभक्ति प्रत्येक देशवासी के हृदय में सदैव अमर रहेगी।”

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी वीर अब्दुल हमीद को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने लिखा, “1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में वीर अब्दुल हमीद ने अद्भुत साहस और पराक्रम का परिचय देते हुए दुश्मन के टैंकों को ध्वस्त कर मातृभूमि की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान दिया। उनका शौर्य और राष्ट्रभक्ति सदैव देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।”

उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कहा, “1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में अपनी जान की परवाह किए बिना दुश्मनों के टैंकों को ध्वस्त कर वीरगति को प्राप्त होने वाले, परमवीर चक्र से सम्मानित अमर शहीद वीर अब्दुल हमीद के बलिदान दिवस पर विनम्र श्रद्धांजलि। राष्ट्ररक्षा के लिए उनके द्वारा दिया गया यह बलिदान सदैव आने वाली पीढ़ियों के हृदय में देशभक्ति की अलख जगाता रहेगा।”

बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने लिखा, “1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले ‘परमवीर चक्र’ से सम्मानित शहीद वीर अब्दुल हमीद जी की पुण्यतिथि पर शत्-शत् नमन। युद्ध के दौरान अदम्य साहस और वीरता का परिचय देते हुए उन्होंने दुश्मन के पैटन टैंकों को ध्वस्त कर भारतीय सेना के शौर्य और पराक्रम का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। उनकी वीरता, राष्ट्रभक्ति और सर्वोच्च बलिदान की गाथा सदैव देशवासियों को प्रेरित करती रहेगी।”

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