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स्टॉक मार्केट में प्रीमियम लिस्टिंग के बाद लुढ़के वीगालैंड डेवलपर्स के शेयर, लोअर सर्किट के बावजूद मुनाफे में आईपीओ निवेशक


व्यापार 18 September 2026
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स्टॉक मार्केट में प्रीमियम लिस्टिंग के बाद लुढ़के वीगालैंड डेवलपर्स के शेयर, लोअर सर्किट के बावजूद मुनाफे में आईपीओ निवेशक

नई दिल्ली, 18 सितंबर । केरल की प्रमुख रियल एस्टेट कंपनी वीगालैंड डेवलपर्स लिमिटेड के शेयरों ने आज स्टॉक मार्केट में मजबूती के साथ एंट्री की। हालांकि लिस्टिंग के बाद मुनाफा वसूली शुरू हो जाने के कारण थोड़ी देर में ही इस शेयर पर लोअर सर्किट लग गया। आईपीओ के तहत कंपनी के शेयर 140 रुपये के भाव पर जारी किए गए थे। आज बीएसई पर इसकी लिस्टिंग 7.86 प्रतिशत प्रीमियम के साथ 151 रुपये के स्तर पर और एनएसई पर इसकी लिस्टिंग 10 प्रतिशत प्रीमियम के साथ 154 रुपये के स्तर पर हुई।

लिस्टिंग के बाद मुनाफा वसूली के चक्कर में बिकवाली शुरू हो गई, जिसकी वजह से इस शेयर की चाल में गिरावट आ गई। लगातार हो रही बिकवाली के कारण थोड़ी देर में ही ये शेयर गिरकर बीएसई पर 143.45 रुपये और एनएसई पर 146.30 रुपये के लोअर सर्किट लेवल पर पहुंच गया। इस तरह प्रीमियम लिस्टिंग होने के बावजूद कंपनी के आईपीओ निवेशकों के मुनाफे में गिरावट आ गई। इस तरह अभी तक के कारोबार के बाद कंपनी के आईपीओ निवेशक प्रति शेयर अधिकतम 6.30 रुपये यानी 4.50 प्रतिशत के फायदे में थे।

इस कंपनी का 210 करोड़ रुपये का आईपीओ 10 से 15 सितंबर के बीच सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों की ओर से अच्छा रिस्पॉन्स मिला था, जिसके कारण ये ओवरऑल 14.60 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इनमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (क्यूआईबी) के लिए रिजर्व पोर्शन 19.13 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसी तरह नॉन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (एनआईआई) के लिए रिजर्व पोर्शन में 19.41 गुना सब्सक्रिप्शन आया था।

इस आईपीओ के तहत 10 रुपये फेस वैल्यू वाले कुल 1.50 करोड़ नए शेयर जारी किए गए हैं। आईपीओ में शेयरों की बिक्री से जुटाए गए पैसे का इस्तेमाल कंपनी अपने वर्तमान में चल रहे प्रोजेक्ट्स और आने वाले प्रोजेक्ट्स के लिए फंडिंग करने, पुराने कर्ज के बोझ को कम करने, आईपीओ से जुड़े खर्चों की भरपाई करने और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों में करेगी।

वीगालैंड डेवलपर्स की वित्तीय स्थिति की बात करें तो कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास जमा कराए गए रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (आरएचपी) में किए गए दावे के मुताबिक इसकी वित्तीय सेहत लगातार मजबूत बनी रही है। वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी को 7.87 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था, जो अगले वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़ कर 20.43 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। वहीं पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी को 26.61 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ।

इस दौरान कंपनी की राजस्व प्राप्ति में लगातार बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2023-24 में इसे 114.61 करोड़ रुपये का कुल राजस्व प्राप्त हुआ, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़ कर 196.22 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। इसी तरह पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी की राजस्व प्राप्ति उछल कर 254.16 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गई।

इस अवधि में कंपनी पर लदे कर्ज का बोझ में उतार चढ़ाव होता रहा। वित्त वर्ष 2023-24 के अंत में कंपनी पर 120.23 करोड़ रुपये के कर्ज का बोझ था, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़ कर 176.97 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। इसके अगले वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें, तो इस वित्त वर्ष के दौरान कंपनी पर लदे कर्ज का बोझ फिसल कर 85.59 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया।

कंपनी के रिजर्व और सरप्लस की बात करें, तो इस अवधि में कंपनी इस मोर्चे पर भी बढ़त हासिल करने में सफल रही है। वित्त वर्ष 2023-24 के अंत में कंपनी का रिजर्व और सरप्लस 40.07 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़ कर 60.44 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। इसी तरह पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में ये उछल कर 233.15 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।

इस अवधि में कंपनी के नेटवर्थ में भी बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी का नेटवर्थ 45.07 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2024-25 में बढ़ कर 65.44 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। इसी तरह पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का नेटवर्थ 266.90 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया था।

अगर कंपनी के ईबीआईटीडीए (अर्निंग बिफोर इंट्रेस्ट, टैक्सेज, डिप्रेशिएशंस एंड एमॉर्टाइजेशन) की बात करें तो 2023-24 में ये 16.72 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2024-25 में बढ़ कर 33.77 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। इसी तरह पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का ईबीआईटीडीए 42.64 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।

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