मौसम में आए इस बदलाव का सबसे अधिक असर किसानों पर पड़ रहा है। प्रदेश के कई इलाकों में धान और अन्य खरीफ फसलें कटाई के लिए तैयार हैं। ऐसे में बारिश होने से खेतों में खड़ी फसल के गिरने और कटी हुई फसल के भीगने का खतरा बढ़ गया है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे मौसम की स्थिति को देखते हुए कटाई और फसल भंडारण का काम सावधानी से करें। जिन किसानों ने फसल काट ली है, उन्हें खुले खेतों में अनाज रखने से बचना चाहिए। बारिश का पानी खेतों में जमा होने से फसलों की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
इसके अलावा तेज हवाओं और आकाशीय बिजली की आशंका को देखते हुए आम लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है। खराब मौसम के दौरान खुले मैदानों, पेड़ों और बिजली के खंभों के नीचे खड़े होने से बचना चाहिए। किसानों और खेतों में काम करने वाले मजदूरों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। मौसम विभाग ने अलग-अलग जिलों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार चेतावनी जारी की है। ऐसे में लोगों को मौसम से जुड़े ताजा अपडेट पर नजर रखनी चाहिए।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 31 अक्टूबर से 2 नवंबर के बीच भी मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां जारी रह सकती हैं। पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ जिलों में 31 अक्टूबर से बारिश की संभावना है, जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी मौसम का उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। इस दौरान गरज-चमक और तेज हवाएं चलने की आशंका है
कुल मिलाकर चक्रवात अर्नब की तीव्रता भले ही कम हो रही हो, लेकिन इसका मौसमी प्रभाव अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। रीवा और सतना समेत मध्य प्रदेश के कई जिलों में बारिश की संभावना ने किसानों और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। अब लोगों को मौसम साफ होने का इंतजार है, ताकि खेती-किसानी के काम दोबारा सामान्य हो सकें।







