बेंगलुरु : कॉमर्स और इंडस्ट्री मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन ने मंगलवार को बेंगलुरु में बड़ी कंपनियों, छोटे और मध्यम उद्योगों (SMEs) तथा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) से अपील की कि वे भारत के बढ़ते फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTAs) नेटवर्क का अधिकतम उपयोग कर निर्यात बढ़ाने पर ध्यान दें। एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान दर्पण जैन ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में भारत का सेवाओं का निर्यात बढ़कर 421 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। उन्होंने बताया कि इसमें सेवाओं का हिस्सा कुल व्यापार का लगभग 70 प्रतिशत रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि सेवाओं के व्यापार से भारत को लगभग 217 अरब डॉलर का सरप्लस मिला है, जिसने देश के मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट को संतुलित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके अनुसार, सेवाओं के क्षेत्र का मजबूत प्रदर्शन भारत की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है और इससे वैश्विक बाजार में देश की स्थिति मजबूत हुई है। दर्पण जैन ने कहा कि भारत ने पिछले पांच वर्षों में 38 देशों के साथ नौ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTAs) पर हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने बताया कि इन समझौतों का उद्देश्य भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजारों में बेहतर पहुंच और प्रतिस्पर्धात्मक लाभ दिलाना है।
उन्होंने उद्योग जगत को संबोधित करते हुए कहा, सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इन FTAs के माध्यम से भारतीय उत्पादों और सेवाओं को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेहतर अवसर मिलें। लेकिन इन अवसरों का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब देश की कंपनियां इन समझौतों का सक्रिय रूप से उपयोग करें। मंत्रालय के अनुसार, भारत तेजी से वैश्विक व्यापार नेटवर्क को मजबूत कर रहा है और विभिन्न देशों के साथ नए व्यापार समझौतों पर भी काम चल रहा है। सरकार का मानना है कि इससे निर्यात को नई दिशा मिलेगी और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
बैठक में बेंगलुरु की आईटी और सेवाक्षेत्र की कंपनियों ने भी भाग लिया। उद्योग प्रतिनिधियों ने FTAs के उपयोग में आने वाली चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा की। SMEs और GCCs ने कहा कि उन्हें वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा के लिए नीति समर्थन और जागरूकता की जरूरत है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का बढ़ता सेवा निर्यात देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार दे रहा है। IT सेवाएं, बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग और डिजिटल सेवाओं ने इसमें महत्वपूर्ण योगदान दिया है। सरकार का जोर अब इस बात पर है कि FTAs केवल कागजी समझौते न रहकर वास्तविक व्यापार वृद्धि का माध्यम बनें। इसके लिए उद्योगों को वैश्विक अवसरों की जानकारी और उनके उपयोग के लिए सक्षम बनाना प्राथमिकता है।







