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शिक्षक (कृषि) भर्ती में बीएड छूट की मांग खारिज, हाईकोर्ट ने कहा- योग्यता तय करना सरकार का अधिकार

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शिक्षक (कृषि) भर्ती में बीएड छूट की मांग खारिज, हाईकोर्ट ने कहा- योग्यता तय करना सरकार का अधिकार


बिलासपुर, 25 अगस्त । बिलासपुर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिक्षक (कृषि) के पद पर भर्ती के लिए निर्धारित बीएड की अनिवार्य योग्यता में एकमुश्त छूट देने से इनकार कर दिया है। जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि, किसी पद के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता और पात्रता की शर्तें तय करना राज्य सरकार और सक्षम नियम बनाने वाले प्राधिकारी के अधिकार क्षेत्र में आता है। अदालत अपनी ओर से निर्धारित योग्यता में छूट नहीं दे सकती।

इस मामले में 65 अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। अभ्यर्थियों का कहना था कि वर्ष 2019 से लागू व्यवस्था में शिक्षक (कृषि) पद के लिए बीएड अनिवार्य नहीं था। बाद में अशोकानंद पटेल बनाम स्टेट ऑफ छत्तीसगढ़ एवं अन्य मामले में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने पूर्व में दी गई बीएड संबंधी छूट को असंवैधानिक और अधिकार क्षेत्र से बाहर माना था। साथ ही राज्य सरकार को NCTE Regulations, 2014 के अनुरूप बीएड को योग्यता में शामिल करने का निर्देश दिया गया था।

इसके बाद राज्य सरकार ने 13 फरवरी 2026 को अधिसूचना जारी कर शिक्षक (कृषि) पद के लिए बीएड को अनिवार्य योग्यता बना दिया।

नई योग्यता के लिए समय नहीं मिलने का दिया तर्क

याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि, शिक्षक (कृषि) भर्ती का शॉर्ट विज्ञापन 28 जुलाई 2026 को जारी किया गया था और आवेदन की अंतिम तिथि 2 सितंबर 2026 रखी गई है। उनके अनुसार बीएड पाठ्यक्रम पूरा करने में करीब दो शैक्षणिक वर्ष लगते हैं। ऐसे में पूर्व नियमों के तहत पात्र रहे अभ्यर्थियों को नई अनिवार्य योग्यता हासिल करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला।

अभ्यर्थियों ने मांग की थी कि, उन्हें मौजूदा भर्ती प्रक्रिया में बीएड के बिना आवेदन करने की अनुमति दी जाए। साथ ही चयन होने पर निर्धारित समय के भीतर बीएड की योग्यता हासिल करने का अवसर दिया जाए।

राज्य सरकार और छत्तीसगढ़ स्टाफ सिलेक्शन बोर्ड ने अभ्यर्थियों की मांग का विरोध किया। उनका कहना था कि अशोकानंद पटेल मामले में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच पहले ही बीएड की आवश्यकता को स्पष्ट कर चुकी है। ऐसे में मौजूदा भर्ती नियमों में निर्धारित अनिवार्य योग्यता से न्यायालय द्वारा छूट देना उचित नहीं होगा।

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने बीएड को अनिवार्य किए जाने को सीधे चुनौती नहीं दी है। उनकी मांग केवल मौजूदा भर्ती के लिए एकमुश्त राहत देने की है।

अदालत ने कहा कि, जब पहले बीएड से दी गई छूट को डिवीजन बेंच असंवैधानिक घोषित कर चुकी है और राज्य सरकार को NCTE Regulations, 2014 के अनुसार योग्यता निर्धारित करने का निर्देश दिया जा चुका है, तब वर्तमान नियमों के तहत निर्धारित योग्यता पूरी किए बिना अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने का अधिकार नहीं मांग सकते।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि, ऐसी छूट देना प्रभावी रूप से उस अनिवार्य योग्यता में एक नया अपवाद बनाने के समान होगा, जिसे सक्षम प्राधिकारी ने निर्धारित किया है।

हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि, किसी भर्ती के लिए पात्रता मानदंड, न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता और सेवा शर्तें निर्धारित करना राज्य सरकार या संबंधित नियम बनाने वाले सक्षम प्राधिकारी का काम है। न्यायालय अपनी राय को सरकार द्वारा निर्धारित पात्रता शर्तों के स्थान पर नहीं रख सकता।

अदालत ने कहा कि, अनुच्छेद 226 के तहत न्यायिक समीक्षा का दायरा नियमों की वैधता, निर्णय प्रक्रिया में मनमानी, दुर्भावना या संवैधानिकता जैसे पहलुओं की जांच तक सीमित है। व्यक्तिगत अभ्यर्थियों को सुविधा देने के लिए अनिवार्य योग्यता में छूट देना न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में नहीं है।

अंततः हाईकोर्ट ने अभ्यर्थियों को मांगी गई संक्रमणकालीन एकमुश्त छूट देने से इनकार करते हुए याचिका को प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि, शिक्षक (कृषि) के पद के लिए मौजूदा नियमों के तहत बीएड अनिवार्य योग्यता है और केवल इस आधार पर कि अभ्यर्थी पुराने नियमों में पात्र थे, उन्हें नई अनिवार्य योग्यता से न्यायिक छूट नहीं दी जा सकती।

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