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ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से नाम हटाने पर राघव चड्ढा का मान सरकार पर हमला, बताया इसे राजनीतिक प्रतिशोध


देश 03 September 2026
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ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से नाम हटाने पर राघव चड्ढा का मान सरकार पर हमला, बताया इसे राजनीतिक प्रतिशोध

नई दिल्ली, 03 सितंबर  पंजाब से राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा ने पंजाब की ड्राफ्ट मतदाता सूची (एस आई आर) से अपना नाम हटाए जाने पर आम आदमी पार्टी (आआपा) की पंजाब सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि वह मोहाली में पंजीकृत मतदाता हैं, फिर भी ड्राफ्ट मतदाता सूची में उन्हें "शिफ्टेड" (स्थानांतरित) दिखा दिया गया।

राघव चड्ढा ने गुरुवार को एक्स पर कहा कि फिलहाल केवल ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित हुई है और 'क्लेम्स एंड ऑब्जेक्शंस' की प्रक्रिया के दौरान नामों में सुधार किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि वह चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत उपलब्ध सभी कानूनी उपाय अपना रहे हैं।

चड्ढा ने आरोप लगाया कि यह कोई साधारण प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि राजनीतिक बदले की कार्रवाई है। उनका दावा है कि उन्हें "शिफ्टेड" घोषित करने से लेकर उसके सत्यापन और उच्च स्तर पर प्रक्रिया पूरी करने तक पंजाब सरकार के अधिकारियों की भूमिका रही है।

उन्होंने कहा कि बूथ लेवल ऑफिसर से लेकर जिला निर्वाचन अधिकारी और मुख्य निर्वाचन अधिकारी तक चुनावी प्रक्रिया में पंजाब सरकार के अधिकारी तैनात हैं और चुनावी ड्यूटी समाप्त होने के बाद उनके तबादले और पदस्थापन राज्य सरकार के अधीन होते हैं। ऐसे में सरकार उन पर राजनीतिक दबाव बना सकती है।

राघव चड्ढा ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी छोड़ने के बाद से पार्टी नेतृत्व उनके खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि पंजाब सरकार ने उनके साथ-साथ पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए अन्य सांसदों को भी निशाना बनाया है।

उन्होंने चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण संबंधी विस्तृत गाइडलाइन के पैरा 4(डी) का हवाला देते हुए कहा कि सांसदों, विधायकों, न्यायपालिका के सदस्यों और अन्य सार्वजनिक हस्तियों के नाम, यदि चिन्हित भी हों, तब भी उन्हें ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल रखा जाना चाहिए ताकि दावा एवं आपत्ति की अवधि में आवश्यक दस्तावेज जमा किए जा सकें।

चड्ढा ने कहा कि वह पंजाब से वर्तमान राज्यसभा सदस्य हैं, इसलिए उनके मामले में इस प्रावधान का पालन नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के निर्देशों की जानबूझकर अनदेखी की गई और कहा कि पंजाब की ड्राफ्ट मतदाता सूची किसी राजनीतिक दल की निजी संपत्ति नहीं है।

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