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9/11 के बाद बदला आतंक का चेहरा, यूरोप में ऑनलाइन नेटवर्क के जरिए युवाओं को बनाया जा रहा हिंसा का हिस्सा


विदेश 08 September 2026
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9/11 के बाद बदला आतंक का चेहरा, यूरोप में ऑनलाइन नेटवर्क के जरिए युवाओं को बनाया जा रहा हिंसा का हिस्सा

अमेरिका में अल-कायदा के 9/11 हमलों के 25 साल बाद भी जिहादी संगठन यूरोप की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बने हुए हैं। हालांकि, अब एक नया खतरा भी तेजी से सामने आया है, जिसमें खास तौर पर युवा लोग ऑनलाइन हिंसा और खतरनाक गतिविधियों की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

यूरोपीय अधिकारी इसे ‘Nihilistic Violent Extremism’ यानी बिना किसी स्पष्ट राजनीतिक या वैचारिक उद्देश्य के हिंसा करने की प्रवृत्ति के रूप में देख रहे हैं। इस नेटवर्क का वास्तविक आकार अभी स्पष्ट नहीं है।

जून और जुलाई में इसे रोकने के लिए चलाए गए अभियान के दौरान नौ यूरोपीय देशों की पुलिस ने ऑनलाइन कम्युनिटी ‘The COM’ से जुड़े करीब 4,340 URL की पहचान की।

‘हिंसा सिर्फ हिंसा के लिए’

EU के Counter-Terrorism Coordinator बार्टजान वेगटर ने AP से बातचीत में कहा कि इस तरह के मामलों में हिंसा को सिर्फ हिंसा के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

उन्होंने बताया कि यह प्रवृत्ति पिछले दो-तीन वर्षों में बढ़ी है। ऑनलाइन नेटवर्क अक्सर युवाओं द्वारा और युवाओं के लिए चलाए जाते हैं। इनका उद्देश्य ऑनलाइन समुदायों में पहचान और प्रतिष्ठा हासिल करने के लिए हिंसा को बढ़ावा देना हो सकता है।

वेगटर के मुताबिक, इसका किसी एक विचारधारा से सीधा संबंध जरूरी नहीं है। कई मामलों में हिंसा खुद को साबित करने और ऑनलाइन समुदाय में दर्जा हासिल करने का माध्यम बन जाती है।

पिछले साल EU में 45 आतंकी हमले

यूरोपीय संघ के 27 देशों में से 10 देशों में पिछले साल कुल 45 आतंकी हमले दर्ज किए गए। इनमें कोई भी बड़े पैमाने पर जनहानि वाला हमला नहीं था।

इनमें करीब आधे हमले नाकाम कर दिए गए या सफल नहीं हो पाए। फिर भी इन घटनाओं में 6 लोगों की मौत हुई।

EU की पुलिस एजेंसी Europol के अनुसार, 21 सदस्य देशों में आतंकवाद से जुड़े होने के संदेह में 486 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

इनमें से 24 हमलों के पीछे जिहादी संगठन थे और कुल गिरफ्तारियों में 70 प्रतिशत से अधिक मामले जिहादी आतंकवाद से जुड़े थे। गिरफ्तार लोगों में करीब एक-तिहाई की उम्र 18 साल से कम थी और इनमें ज्यादातर लड़के थे।

नाबालिग भी बन रहे हैं हिंसक नेटवर्क का हिस्सा

Europol ‘Nihilistic Violent Extremism’ के अलग आंकड़े नहीं रखता, क्योंकि इसकी परिभाषा अलग-अलग हो सकती है और कुछ घटनाएं आतंकवाद के बजाय सामान्य अपराध की श्रेणी में भी आ सकती हैं।

फिनलैंड में 2025 में 16 साल के एक लड़के ने तीन महिला छात्र साथियों पर चाकू से हमला किया था। आरोप है कि उसने WhatsApp ग्रुप में एक ‘मैनिफेस्टो’ साझा किया, Snapchat पर हमले का वीडियो रिकॉर्ड किया और सोशल मीडिया पर किसी से उस वीडियो को सुरक्षित रखने और उसकी रिहाई के बाद उसे देने के लिए कहा।

उस ‘मैनिफेस्टो’ में उसने कुछ ‘महत्वपूर्ण’ और ‘रोमांचक’ करने की इच्छा जताई थी। EU के एक दस्तावेज के अनुसार, इस हमले के पीछे कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं बताया गया था।

इटली में भी पिछले साल 15 साल के एक लड़के ने ऑनलाइन बदनामी और पहचान हासिल करने के लिए हत्या की योजना बनाई थी। अधिकारियों के अनुसार, उसके फोन में हमले, हत्या, स्कूल शूटिंग और बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो मौजूद थे।

ऑनलाइन हिंसा का असर अब जमीन पर भी

वेगटर ने कहा कि ये घटनाएं अलग-अलग और अकेली घटनाएं नहीं हैं, बल्कि ऑनलाइन नेटवर्क से जुड़ी हो सकती हैं। ऐसे नेटवर्क अक्सर युवाओं, खासकर लड़कों के बीच सक्रिय रहते हैं और ऑनलाइन गतिविधियों से आगे बढ़कर वास्तविक दुनिया में हिंसा तक पहुंच सकते हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में चाकूबाजी जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं, जिसमें किसी बुजुर्ग व्यक्ति पर बिना किसी स्पष्ट कारण के हमला किया गया।

इन मामलों को रोकना सुरक्षा एजेंसियों के लिए मुश्किल है, क्योंकि संदिग्ध अक्सर ऐसे युवा होते हैं जिनका पहले कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होता। उनकी गतिविधियों के निशान मुख्य रूप से ऑनलाइन मिलते हैं और कई बार ये गतिविधियां एन्क्रिप्टेड ऑनलाइन समुदायों के पीछे छिपी होती हैं।

764 ग्रुप पर भी नजर

सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में आने वाले समूहों में 764 भी शामिल है। यह समूह अमेरिकी हाई स्कूल छोड़ने वाले ब्रैडली कैडेनहेड ने बनाया था। वह बाल पोर्नोग्राफी और यौन अपराधों के मामले में 80 साल की जेल की सजा काट रहा है, लेकिन समूह की ऑनलाइन गतिविधियां अब भी जारी हैं।

EU के दस्तावेज के अनुसार, जर्मनी में पिछले साल 764 से जुड़े एक 20 वर्षीय व्यक्ति पर हत्या, दुष्कर्म और बच्चों के यौन शोषण समेत बेहद गंभीर अपराधों के 123 आरोप लगाए गए थे।

9/11 के दौर से बदला आतंकी खतरा

यूरोपीय अधिकारियों के मुताबिक, 25 साल पहले 9/11 के समय आतंकवादी खतरा आज से काफी अलग था। उस समय कट्टरपंथी समूहों के सदस्य, जिनमें ज्यादातर सऊदी अरब से आए लोग शामिल थे, अमेरिका पहुंचकर विमान उड़ाने की ट्रेनिंग लेते थे।

आज यूरोप के सामने मौजूद खतरे का बड़ा हिस्सा ऑनलाइन नेटवर्क से संगठित हो रहा है।

वेगटर ने कहा कि इंटरनेट कई अच्छी सुविधाएं देता है, लेकिन ऑनलाइन वातावरण अभी भी ऐसी गतिविधियों के लिए बहुत खुला है। उनके अनुसार, यह अलग-अलग खतरों को एक-दूसरे से जोड़ने वाली जगह बन गया है।

85 प्रतिशत जांच डिजिटल वातावरण में

गोपनीयता की रक्षा करने वाले संगठन लोगों के बिना अनुचित निगरानी के संवाद करने के अधिकार पर जोर देते हैं। उनका आरोप है कि सुरक्षा एजेंसियां और कुछ कंपनियां स्पाइवेयर जैसी तकनीकों के जरिए निजता की सुरक्षा को कमजोर कर रही हैं।

वहीं, वेगटर का कहना है कि कानून लागू करने वाली एजेंसियों को आज के खतरे से निपटने के लिए जरूरी तकनीक और संसाधन उपलब्ध कराने होंगे। उन्होंने बताया कि करीब 85 प्रतिशत जांच डिजिटल वातावरण में होती हैं।

उन्होंने दूसरे देशों की सुरक्षा एजेंसियों और संगठनों के साथ सहयोग बढ़ाने की जरूरत भी बताई, खासकर उन देशों के साथ जहां ऐसे ऑनलाइन समूह अपने नेटवर्क के लिए आधार तैयार कर सकते हैं।

AI से बढ़ रहा हिंसक कंटेंट का प्रसार

Europol के अनुसार, अपराधी प्रचार सामग्री तैयार करने और उसमें बदलाव करने के लिए तस्वीरों और ऑडियो का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसमें Deepfake, Meme और GIF जैसी सामग्री शामिल है।

AI आधारित बॉट्स का इस्तेमाल भर्ती बढ़ाने और आतंकी विचारधाराओं को फैलाने के लिए भी किया जा रहा है। इसके अलावा AI आधारित ऐप्स का इस्तेमाल हमलों की तैयारी के लिए रिसर्च में किए जाने की बात भी सामने आई है।

वेगटर के अनुसार, हिंसक सामग्री, हिंसा के लिए उकसाने वाला कंटेंट, प्रचार सामग्री, मैनुअल और हमले की रणनीतियां AI के जरिए और तेजी से फैल रही हैं।


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