नई दिल्ली, 16 सितंबर। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने कहा कि 2000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेन-देन पर 0.4 फीसदी का शुल्क (एमडीआर) लागू करना भारत के डिजिटल पेमेंट ईकोसिस्टम की लंबे समय तक निरंतरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
आरबीआई ने साेशल मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ पर जारी एक पोस्ट में बताया कि ईकोसिस्टम में एमडीआर का उचित और सही बंटवारा तकनीक, बुनियादी ढांचे एवं स्वीकार्यता तंत्र में लगातार निवेश को बढ़ावा देगा। केंद्रीय बैंक ने कहा कि इससे यूपीआई को देश भर में ग्राहकों और व्यवसायों के लिए आगे बढ़ने, नवाचार करने व सेवाएं देने में मदद मिलेगी।
आरबीआई ने कहा कि इससे यूपीआई को व्यापक स्वीकार्यता, ग्राहकों की संख्या को बढ़ाने और लेन-देन की मात्रा में लगातार बढ़ोतरी में मदद मिल सकती है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण यह है कि सभी यूपीआइ लेनदेन (व्यक्ति-से-व्यक्ति एवं व्यक्ति-से-व्यापारी या मर्चेंट) यूजर्स के लिए मुफ्त रहेंगे और 2000 रुपये से कम के व्यक्ति से व्यापारी को लेनदेन व्यापारी के लिए भी मुफ्त बने रहेंगे।
केंद्रीय बैंक ने आश्वस्त किया, "रिजर्व बैंक यह सुनिश्चित करने के लिए भी प्रतिबद्ध है कि यूपीआई सुरक्षित, निर्बाध, सस्ता और सुलभ बना रहे। इसके साथ ही भारत के विश्वस्तरीय डिजिटल पेमेंट ईकोसिस्टम की लंबे समय तक निरंतरता और विकास को भी बढ़ावा दे।"
इससे एक दिन पहले भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) ने कहा कि सरकार ने बड़े डिजिटल भुगतान के लिए जारी की गई नई व्यवस्था के तहत 2 हजार रुपये से अधिक के यूपीआई लेन-देन पाने पर व्यापारियों से 0.4 फीसदी ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (एमडीआर) शुल्क लेना तय किया है। हालांकि, यूपीआई पेमेंट पर इस तरह के चार्ज लगने का आम उपभोक्ताओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
वहीं, वित्त मंत्रालय ने जारी एक बयान में बताया कि नई व्यवस्था के तहत 2 हजार रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पाने पर व्यापारियों से 0.4 फीसदी का एमडीआर शुल्क लेना तय किया गया है। इसमें 75 हजार रुपये या उससे अधिक के भुगतान पर अधिकतम शुल्क 300 रुपये होगा। नए बदलाव 15 अक्टूबर, 2026 से प्रभावी हो जाएंगे। रेलवे, दूरसंचार और ईंधन जैसे आवश्यक क्षेत्रों में प्रति लेनदेन 5 रुपये का एकसमान शुल्क लगेगा, जबकि पूंजी बाजार में भुगतान के लिए एमडीआर की दर 0.02 फीसदी होगी।
उल्लेखनीय है कि, यूपीआई का संचालन नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) करता है, जो रिजर्व बैंक व इंडियन बैंक्स एसोसिएशन की पहल है। यह लोगों के बीच रियल-टाइम पेमेंट की सुविधा देता है और ग्राहकों को खरीदारी करते समय सीधे मर्चेंट को पेमेंट करने में मदद करता है।







