पंकज त्रिपाठी बड़े ही देसी टाइप के एक्टर नजर आते हैं. असल जिंदगी में तो वे मिट्टी से जुड़े शख्स हैं ही लेकिन पर्दे पर भी उन्होंने कुछ इस तरह के किरदार निभाए हैं कि उन्हें देखकर हमेशा वही ठेठ देसी अंदाज दिमाग में आता है. खैर पर्दे पर तो वे काली भैया भी बने हैं
लेकिन असल जिंदगी में भी उनका रौला कुछ कम नहीं. वह कुछ इस तरह के इंसान हैं कि बचपन में सांपों से खेला करते थे. पकंज के बारे में ये खुलासा एक मीडिया चैनल के साथ हुई खास बातचीत में हुआ था.
दरअसल पंकज 'आप की अदालत' शो पर मेहमान बनकर पहुंचे थे. यहां उनसे सवाल किया गया, आपके गांव वालों ने बताया कि आप बचपन से ही शरारती थे. जेब में सांप रख के ले जाते थे. लोगों को डराते थे. सांप की रस्सी बना के घुमाते थे. क्या यह दावे सच हैं?
इस पर पंकज त्रिपाठी ने कहा, हां हां सच है और सच इस कारण से है कि गांव में उतने खिलौने थे नहीं. टीवी रेडियो था नहीं तो हम सांप बिच्छू से ही खेलेंगे ना. खेलने के चांद तारे थे तितलियां थी सांप थे बिच्छू थे गली मोहल्ले के कुत्ते थे इन्हीं के साथ खेलते थे. इस पर एंकर ने सवाल किया तो साइकिल पे सांप लपेट के ले आते थे.
इस पर पंकज ने कहा, वो एक बार दुर्घटना गलती से हो गई थी. दुर्घटना गलती से हो जाए तो गांव वाले उसे बढ़ा चढ़ा कर बोलते हैं कि मैंने बहादुरी का काम किया है. पेड़ से गिर गए और चोट लग गई तो बोले कि कूदे थे हम. असल में हम गिरे थे तो इस तरह की बातें खूब बनती थीं.
लड़कियों में मशहूर होने के लिए दिखाते थे साइकिल के करतब
पंकज त्रिपाठी से जब पूछा गया कि क्या वह साइकिल के करतब दिखाते थे तो उन्होंने कहा हां साइकिल के करतब दिखाता क्योंकि हमारे यहां एक लड़का था जो ऐसा करता था
और वह लड़कियों के बीच बहुत पॉपुलर था. ये करीब सातवीं-आठवीं की बात है. स्कूल में एक प्रतियोगिता होती थी स्लो साइकिल की जो धीरे साइकिल चलाएगा वो जीतेगा. जो स्लो साइकिल रेस का विनर था वह बहुत पॉपुलर था तो हम भी सीखने लगे कि अगले साल हम भी विनर बनेंगे.







