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जलवायु आपदा से उबरने के लिए नेपाल को दीर्घकालीन अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी: विदेशमंत्री शिशिर खनाल


विदेश 24 September 2026
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जलवायु आपदा से उबरने के लिए नेपाल को दीर्घकालीन अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी: विदेशमंत्री शिशिर खनाल

काठमांडू, 24 सितंबर। नेपाल के विदेशमंत्री शिशिर खनाल ने जलवायुजनित आपदाओं से प्रभावित नेपाल में पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए दीर्घकालीन अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के अवसर पर आयोजित जी-7 विकास मंत्रीस्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए खनाल ने नेपाल में हाल की जलवायुजनित आपदा की स्थिति का उल्लेख किया और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने पीड़ितों के पुनर्वास, जलवायु वित्त, आपदा पूर्व तैयारी, बहुपक्षीय वित्तीय सहयोग और हिमालयी क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर जी-7 के सहयोग और साझेदारी का आह्वान किया।

नेपाल का प्रतिनिधितत्व करते हुए खनाल ने जलवायु आपदा की कठिन परिस्थितियों में नेपाल के प्रति एकजुटता और सहयोग के लिए जी-7 सदस्य देशों तथा अन्य मित्र राष्ट्रों के प्रति नेपाल सरकार और नेपाली जनता की ओर से आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा, “नेपाल जलवायु परिवर्तन, सतत विकास, लचीलापन और आपदा जोखिम न्यूनीकरण के क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने में जी-7 के नेतृत्व की उच्च सराहना करता है।” उन्होंने बैठक के आयोजन के लिए जी-7 की अध्यक्षता कर रहे फ्रांस को भी धन्यवाद दिया।

पुनर्निर्माण के लिए 5 अरब डॉलर से अधिक की जरूरत

मंत्री खनाल ने कहा कि हाल की जलवायुजनित आपदा से नेपाल में मानवीय और भौतिक क्षति बेहद व्यापक हुई है। बाढ़ से घरों, सड़कों, पुलों, स्कूलों, स्वास्थ्य संस्थानों और जलविद्युत बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। इससे जनजीवन के साथ-साथ आवश्यक सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं।

उन्होंने बताया कि प्रारंभिक आकलन के अनुसार पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए 5 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की आवश्यकता होगी। आपदा के वैज्ञानिक अध्ययन का काम जारी होने की जानकारी देते हुए खनाल ने कहा कि शुरुआती विवरणों के अनुसार तेजी से गर्म हो रहे हिमालयी वातावरण में बर्फ, चट्टान, पानी और अस्थिर भू-आकृतियों के बीच जटिल अंतःक्रिया के कारण यह आपदा उत्पन्न हुई हो सकती है। उन्होंने कहा कि इसका विस्तृत अध्ययन अभी जारी है। उन्होंने बताया कि सरकार ने जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ भूगर्भीय, हिमनदीय और जलविज्ञान संबंधी कारणों का अध्ययन करने के लिए विशेषज्ञ समिति का गठन किया है।

‘जलवायु परिवर्तन अब दूर का खतरा नहीं’

खनाल ने कहा, “जलवायु परिवर्तन नेपाल के लिए अब दूर का खतरा नहीं है। यह हमारी वर्तमान वास्तविकता है और इसके प्रभाव की तीव्रता तथा आवृत्ति दोनों बढ़ रही हैं।” उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन से जनधन और आजीविका को नुकसान पहुंचने के साथ लंबे प्रयासों से हासिल विकास की उपलब्धियां भी प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि हिमालय, नदियां, समुदाय और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे बाढ़, भूस्खलन, हिमनदीय जोखिम तथा अन्य जलवायुजनित आपदाओं के बढ़ते खतरे का सामना कर रहे हैं।

खनाल ने कहा कि वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में नेपाल का योगदान बेहद कम है, लेकिन इसके बावजूद देश को जलवायु परिवर्तन के असमान प्रभावों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से नेपाल को और अधिक सहयोग देने की अपील की। उन्होंने कहा, “नेपाल का वैश्विक उत्सर्जन में योगदान बेहद कम है। लेकिन विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन से लेकर हिमनदों के पिघलने तक के जलवायुजनित प्रभावों को हम असमान रूप से झेल रहे हैं।”

नेपाल की पांच प्रमुख अपेक्षाएं

पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए नेपाल की पांच प्रमुख अपेक्षाएं सामने रखते हुए खनाल ने सबसे पहले पुनर्वास के लिए साझेदारी की आवश्यकता बताई।

मानवीय सहायता के लिए मित्र देशों से मिले सहयोग और सद्भावना के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि दीर्घकालीन पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए अनुदान तथा रियायती वित्तीय संसाधनों सहित समन्वित अंतरराष्ट्रीय प्रयास जरूरी हैं।

दूसरी प्राथमिकता के रूप में उन्होंने जलवायु वित्त तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि अनुकूलन तथा जलवायु परिवर्तन से होने वाली हानि और क्षति (Loss and Damage) के लिए वित्तीय सहायता विकासशील और जलवायु जोखिम वाले देशों को तेज, सरल और सहज तरीके से उपलब्ध होनी चाहिए।

उन्होंने बताया कि नेपाल ने हानि और क्षति कोष से संबंधित वित्तीय व्यवस्था के लिए अनुरोध किया है और अब सकारात्मक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा कर रहा है।

आपदा पूर्व चेतावनी प्रणाली में निवेश बढ़ाने की अपील

खनाल ने आपदा रोकथाम और पूर्व तैयारी में निवेश बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने पूर्व चेतावनी प्रणाली, जलवायु संबंधी जानकारी, जल एवं मौसम सेवाओं, जलवायु-लचीले बुनियादी ढांचे तथा समुदाय आधारित आपदा पूर्व तैयारी कार्यक्रमों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। उन्होंने जी-7 और अन्य साझेदार देशों से जलवायुजनित आपदाओं की बढ़ती गंभीरता से निपटने के लिए इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की अपील की। उन्होंने बहुपक्षीय वित्तीय संस्थानों के माध्यम से तेजी से, कम लागत पर और आसानी से वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

खनाल ने कहा, “समय पर उपलब्ध वित्तीय संसाधन केवल एक वित्तीय साधन नहीं, बल्कि जलवायुजनित झटकों से बार-बार प्रभावित होने वाले जोखिमग्रस्त देशों के लिए जीवनरेखा हैं।” उन्होंने जी-7 सदस्य देशों से बहुपक्षीय विकास बैंकों और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के साथ मिलकर आवश्यक वित्तीय संसाधन जुटाने में अपने प्रभाव और समन्वय क्षमता का इस्तेमाल करने का आग्रह किया।

हिमालय को वैश्विक जलवायु एजेंडे में प्राथमिकता देने की मांग

खनाल ने हिमालयी क्षेत्र को वैश्विक जलवायु एजेंडे में अधिक प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हिमनदों, हिमालय और जल प्रणालियों का भविष्य क्षेत्रीय और वैश्विक जलवायु सुरक्षा से सीधे जुड़ा हुआ है।

उन्होंने कहा, “हिमालय में होने वाला बदलाव केवल हिमालय तक सीमित नहीं रहता। इसका प्रभाव दक्षिण एशिया और उससे आगे मानसून प्रणाली, नदी तटीय क्षेत्रों, कृषि प्रणालियों और लाखों लोगों के जीवन पर पड़ता है।” खनाल ने हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण और साझा जलवायु लचीलेपन को बढ़ाने के लिए जी-7 के साथ सहयोग करने की नेपाल की तत्परता जताई।

भोटेकोशी आपदा को बताया गंभीर वैश्विक संदेश

विदेश मंत्री खनाल ने भोटेकोशी आपदा को केवल नेपाल तक सीमित त्रासदी के रूप में नहीं देखने का आग्रह किया। उन्होंने इसे हिमालय की ओर से पूरी दुनिया के लिए एक गंभीर संदेश बताया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय एकजुटता को ठोस कार्रवाई, जोखिम को लचीलेपन और साझा जिम्मेदारी को जलवायु न्याय में बदलने की आवश्यकता पर जोर दिया। खनाल ने कहा, “नेपाल एक सुरक्षित, लचीली और टिकाऊ दुनिया के निर्माण के लिए जी-7 सहित सभी अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ सहयोग करने के लिए तैयार है।”

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