केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कल नई दिल्ली में आयोजित 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में 20 पुरस्कार विजेता कलाकारों को सम्मानित किया। इस प्रदर्शनी का आयोजन ललित कला अकादमी द्वारा किया गया था। सभा को संबोधित करते हुए श्री शेखावत ने रचनात्मकता और सतत विकास के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित 'सेवा ही संस्कृति' पहल यह दर्शाती है कि रचनात्मकता और सेवा भावना किस प्रकार सार्थक रूप से एक साथ आ सकती हैं। उन्होंने ललित कला अकादमी के विभिन्न क्षेत्रों में किए गए प्रयासों की सराहना की, जिनमें 'कचरे से चमत्कार' पहल भी शामिल है, जो बेकार पड़ी सामग्रियों को एक नया कलात्मक रूप देती है और सतत विकास को बढ़ावा देने में कला की भूमिका को उजागर करती है।
ललित कला अकादमी द्वारा आयोजित इस महत्वपूर्ण प्रदर्शनी में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए कलाकारों की रचनात्मक प्रतिभा, कलात्मक दृष्टिकोण और समकालीन विषयों के प्रति उनकी संवेदनशीलता को प्रदर्शित किया गया। इस अवसर पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए श्री शेखावत ने कला और रचनात्मकता के महत्व के साथ-साथ सतत विकास की आवश्यकता पर भी विशेष रूप से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कला केवल सौंदर्य और अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज में सकारात्मक बदलाव लाने, लोगों को जागरूक करने और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का प्रभावी माध्यम भी बन सकती है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित ‘सेवा ही संस्कृति’ पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पहल रचनात्मकता और सेवा भावना के सार्थक मेल का उदाहरण प्रस्तुत करती है। इस पहल के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि कला और संस्कृति को समाज सेवा तथा जनकल्याण से जोड़ा जा सकता है। केंद्रीय मंत्री ने ललित कला अकादमी द्वारा कला के क्षेत्र में किए जा रहे विभिन्न प्रयासों की सराहना की और कहा कि अकादमी देश की कलात्मक परंपराओं को आगे बढ़ाने के साथ-साथ नए कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के अवसर प्रदान कर रही है। उन्होंने विशेष रूप से ‘कचरे से चमत्कार’ जैसी पहल की प्रशंसा की, जिसके अंतर्गत बेकार पड़ी और अनुपयोगी सामग्रियों को रचनात्मक तरीके से नया कलात्मक रूप दिया जाता है। इस प्रकार की पहल न केवल कला की नई संभावनाओं को सामने लाती है, बल्कि लोगों को पुनर्चक्रण, संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग और पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी जागरूक करती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आज के समय में सतत विकास केवल सरकारों या संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता आवश्यक है। कलाकार अपनी रचनात्मकता के माध्यम से पर्यावरण, सामाजिक जिम्मेदारी और सतत जीवनशैली जैसे महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली ढंग से समाज तक पहुंचा सकते हैं। राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी जैसे आयोजन कलाकारों को अपनी प्रतिभा और विचारों को व्यापक मंच देने के साथ-साथ कला के माध्यम से सामाजिक सरोकारों को अभिव्यक्त करने का अवसर प्रदान करते हैं। इस अवसर पर सम्मानित 20 कलाकारों की उपलब्धियां कला जगत में उनकी मेहनत, मौलिकता और समर्पण को रेखांकित करती हैं। समारोह ने यह संदेश भी मजबूत किया कि भारतीय कला और संस्कृति की समृद्ध परंपरा आधुनिक रचनात्मकता, सामाजिक सेवा और सतत विकास की अवधारणाओं के साथ आगे बढ़ सकती है।







