ग्रामीण भारत में सरकारी योजनाओं और सेवाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाने में प्रशिक्षित सामुदायिक कैडर और अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ता महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। देशभर में 9 लाख से अधिक सामुदायिक संसाधन व्यक्ति (सीआरपी) सरकारी संस्थानों और ग्रामीण परिवारों के बीच कड़ी के रूप में काम कर रहे हैं। इनमें करीब 4.08 लाख आजीविका सीआरपी कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, वनोपज और उद्यम विकास जैसे क्षेत्रों में तकनीकी एवं आजीविका संबंधी सहायता दे रहे हैं। इनके अलावा 10.40 लाख से अधिक आशा कार्यकर्ता और 10.58 लाख प्रशिक्षित आंगनवाड़ी कार्यकर्ता स्वास्थ्य, पोषण और प्रारंभिक बाल्यावस्था सेवाओं को गांवों तक पहुंचाने में योगदान दे रहे हैं।
अंतिम छोर तक वितरण का मजबूत नेटवर्क
ग्रामीण विकास के लिए आजीविका, स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता, पेयजल, आवास, वित्तीय समावेशन और रोजगार जैसे क्षेत्रों में विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में जमीनी कार्यकर्ताओं का नेटवर्क अहम भूमिका निभाता है। यह नेटवर्क समुदायों के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखते हुए सेवाओं और योजनाओं का अंतिम-मील तक समयबद्ध वितरण सुनिश्चित करने में मदद करता है।
अलग-अलग क्षेत्रों में विशेषज्ञ भूमिका
9 लाख से अधिक सीआरपी कृषि, बैंकिंग, बीमा, वित्तीय साक्षरता और सामाजिक विकास जैसे क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे हैं। करीब 4.08 लाख सीआरपी कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों तथा ग्रामीण उद्यमों से जुड़ी आजीविका के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। इन्हें कृषि सखी, पशु सखी, मत्स्य सखी और वन सखी जैसे नामों से जाना जाता है। करीब 5 लाख अन्य सीआरपी बैंक सखी, बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट सखी, वित्तीय साक्षरता सीआरपी, बीमा सखी और जेंडर चैंपियन के रूप में काम कर रहे हैं। ये वित्तीय समावेशन, बीमा, लैंगिक जागरूकता और सामुदायिक विकास से जुड़ी जरूरतों में सहयोग देते हैं। वहीं, स्वच्छाग्रही स्वच्छता और व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
प्रशिक्षक से योजना सुविधाकर्ता तक
सामुदायिक कैडर मॉडल केवल सेवा वितरण तक सीमित नहीं है। ये कार्यकर्ता प्रशिक्षक के रूप में सहकर्मी शिक्षण और कौशल हस्तांतरण में मदद करते हैं। सेवा प्रदाता के रूप में आजीविका और वित्तीय सेवाओं तक पहुंच बनाते हैं। व्यवहार परिवर्तन एजेंट के रूप में स्वास्थ्य, स्वच्छता और सामाजिक समावेशन से जुड़े सकारात्मक व्यवहारों को प्रोत्साहित करते हैं। योजना सुविधाकर्ता के रूप में वे दस्तावेजीकरण, सत्यापन, विभिन्न सेवाओं से जुड़ाव और सरकारी योजनाओं के अभिसरण में सहायता करते हैं। संबंधित सरकारी दिशानिर्देशों के अनुसार इन अग्रिम पंक्ति के ग्रामीण कैडर को आमतौर पर गतिविधि आधारित मुआवजा या प्रोत्साहन दिया जाता है।
आजीविका से उद्यमिता तक विस्तार
दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को उनके घरों के करीब आजीविका, वित्तीय सेवाओं और सामाजिक विकास से जुड़े अवसर उपलब्ध कराने के लिए सामुदायिक संस्थाओं को मजबूत किया गया है। इसके तहत 10 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों को करीब 92 लाख स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा गया है। इन संस्थाओं में ग्राम संगठनों और क्लस्टर स्तरीय संघों के साथ विभिन्न विषयों में काम करने वाले सीआरपी का व्यापक नेटवर्क शामिल है। समुदाय से चयनित इन कैडरों को प्रशिक्षण, मैदानी मार्गदर्शन और निरंतर क्षमता निर्माण दिया जाता है।
कृषि सखियों से वन सखियों तक
कृषि आजीविका से जुड़े सीआरपी किसानों और स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों को बेहतर कृषि पद्धतियों, पशुधन प्रबंधन, उत्पादकता और आजीविका सेवाओं तक पहुंच में सहायता करते हैं। जून 2025 तक 4.62 करोड़ से अधिक महिला किसानों को कृषि आजीविका से जुड़े हस्तक्षेपों के दायरे में लाया गया था और उन्हें 3 लाख से अधिक प्रशिक्षित आजीविका सीआरपी का सहयोग मिला। वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 के अनुसार 1.91 लाख से अधिक कृषि सखियों को संगठित किया गया है। ये किसान सेवा प्रदाता के रूप में टिकाऊ कृषि और कृषि उत्पादों के विपणन को बढ़ावा देती हैं। वन आधारित क्षेत्रों में करीब 2,993 वन सखियां गैर-लकड़ी वन उत्पादों के संग्रह, खेती और मूल्यवर्धन से जुड़ी सहायता प्रदान कर रही हैं।
पशुपालन और मत्स्य पालन में सहयोग
पशु सखियां पशुधन पालने वाले परिवारों को पशु स्वास्थ्य, इनपुट लागत कम करने और उत्पादकता बढ़ाने में मदद करती हैं। करीब 1.70 लाख पशु सखियों को इस कार्य के लिए जुटाया गया है। इसी तरह 2,012 से अधिक मत्स्य सखियां मत्स्य आधारित आजीविका और बाजार तक पहुंच बढ़ाने में सहायता दे रही हैं।
ग्रामीण उद्यमों को मिल रहा सहारा
कृषि के अलावा गैर-कृषि आजीविका और उद्यम विकास पर भी जोर दिया जा रहा है। सीआरपी-ईपी और उद्योग सखियां ग्रामीण परिवारों को व्यवसाय के अवसरों की पहचान, उद्यम योजना तैयार करने, ऋण तक पहुंच और बाजार संपर्क स्थापित करने में सहायता देती हैं। करीब 48,785 उद्योग सखियों और एसवीईपी के तहत काम करने वाले सीआरपी-ईपी के नेटवर्क के माध्यम से 4.11 लाख से अधिक उद्यमों को समर्थन दिया गया है। जून 2026 तक एसवीईपी के तहत 4.32 लाख उद्यमों को सहायता प्रदान की गई। इसके अलावा उद्यमिता पर राष्ट्रीय अभियान के तहत 50,000 सीआरपी को उद्यम संवर्धन में प्रशिक्षित करने और 50 लाख स्वयं सहायता समूह सदस्यों को उद्यम विकास का प्रशिक्षण देने की योजना है।
गांव-गांव वित्तीय सशक्तिकरण
बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट (बीसी) सखियां और बैंक सखियां ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। 1.48 लाख से अधिक बीसी सखियां खाता खोलने, जमा, निकासी, फंड ट्रांसफर और बैलेंस संबंधी सेवाएं गांवों में उपलब्ध करा रही हैं। 50,548 से अधिक शाखा-स्तरीय बैंक सखियां स्वयं सहायता समूहों के लिए क्रेडिट लिंकेज में सहायता करती हैं। 2013-14 से अब तक बैंक सखियों की मदद से स्वयं सहायता समूहों को 13.41 लाख करोड़ रुपए का बैंक ऋण प्राप्त हुआ है।
वित्तीय साक्षरता का विस्तार
करीब 56,727 वित्तीय साक्षरता सीआरपी गांवों में जागरूकता अभियान चलाकर वित्तीय मामलों में सूचित निर्णय लेने को बढ़ावा दे रहे हैं। वर्ष 2025-26 में 3.81 करोड़ से अधिक महिला स्वयं सहायता समूह सदस्यों को वित्तीय योजना, बचत, ऋण, बीमा, पेंशन, उद्यम वित्तपोषण और बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंस जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया।
देबश्री की कहानी: बैंकिंग से उद्यमिता तक
असम के नगांव जिले में देबश्री गोगोई बोरा की यात्रा बताती है कि किस तरह बीसी सखियां ग्रामीण बैंकिंग सेवाओं के साथ अन्य आजीविका अवसर भी विकसित कर रही हैं। कार्यक्रम से जुड़ने के बाद उन्होंने बुनियादी बैंकिंग लेनदेन से शुरुआत की, कॉमन सर्विस सेंटर की आईडी प्राप्त की और ग्राहक सेवा केंद्र स्थापित किया। पांच वर्षों से अधिक समय से वह ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर वित्तीय सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं। पीएम किसान और अरुणोदय जैसी योजनाओं के लाभ तक पहुंच में भी उन्होंने लोगों की मदद की। प्रतिदिन करीब 30-35 ग्राहकों को सेवा देने वाली देबश्री ने अप्रैल से अगस्त के बीच 2,500 से अधिक लेनदेन किए और 10,000-17,000 रुपए मासिक कमीशन अर्जित किया। बैंकिंग के साथ वह डेस्कटॉप पब्लिशिंग, फोटोकॉपी और फोटो प्रिंटिंग का व्यवसाय भी चलाती हैं। उनका अनुभव बताता है कि सामुदायिक कैडर मॉडल ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन के साथ विविध उद्यमों के अवसर भी पैदा कर सकता है।
स्वास्थ्य और पोषण की पहली कड़ी
ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में 10.40 लाख से अधिक आशा कार्यकर्ता समुदाय और स्वास्थ्य प्रणाली के बीच संपर्क की पहली कड़ी के रूप में काम कर रही हैं। वे स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप स्वास्थ्य सेवाओं और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों से जुड़ी गतिविधियों में सहयोग देती हैं तथा प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन प्राप्त करती हैं। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एकीकृत बाल विकास सेवाओं और पोषण 2.0 के तहत पोषण तथा प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल को मजबूत कर रही हैं। वे बच्चों में कुपोषण की पहचान, पूरक पोषण, स्तनपान, आहार, स्वच्छता और साफ-सफाई से जुड़े व्यवहारों को बढ़ावा देने में योगदान देती हैं।
आंगनवाड़ी से प्रारंभिक शिक्षा तक
‘पोषण भी पढ़ाई भी’ पहल के तहत आंगनवाड़ी केंद्रों को बेहतर बुनियादी ढांचे, खेल आधारित शिक्षण सामग्री और प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं से सुसज्जित करने पर जोर दिया जा रहा है। मार्च 2026 तक 10.58 लाख से अधिक आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया जा चुका था। इससे प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा की जमीनी पहुंच और क्षमता को मजबूत करने में मदद मिली है।
स्वच्छता व्यवहार में स्वच्छाग्रहियों की भूमिका
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत स्वच्छाग्रही स्वच्छता और व्यवहार परिवर्तन के जमीनी कार्यकर्ता के रूप में काम करते हैं। इनमें आशा, एएनएम, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, जल लाइनमैन, पंप ऑपरेटर और अन्य स्थानीय समुदाय सदस्य शामिल हो सकते हैं। एसबीएम (जी) क्षमता निर्माण डैशबोर्ड के अनुसार 10.36 लाख से अधिक पदाधिकारियों और 36,342 मास्टर प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया है। प्रशिक्षण के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता सेवाओं के क्रियान्वयन और व्यवहार परिवर्तन की क्षमता को मजबूत किया जा रहा है।
बस्तर में स्वच्छता से आजीविका तक
बस्तर में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने स्वच्छता दीदी के रूप में सामुदायिक अपशिष्ट प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाली। एसएलआरएम केंद्रों की स्थापना के साथ यह पहल 114 गांवों और 71 ग्राम पंचायतों तक पहुंची। इन केंद्रों ने कचरा संग्रह, पृथक्करण, परिवहन, प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण की व्यवस्थित व्यवस्था विकसित की। एसएलआरएम केंद्रों ने एक वर्ष में 12.22 लाख रुपए से अधिक का राजस्व अर्जित किया, जबकि 2017-22 के पांच वर्षों में कुल आय 15.20 लाख रुपए रही थी। ग्रामीण क्षेत्रों में एसएचजी महिलाओं को पंचायतों से 1.52 लाख रुपए और सामग्री वसूली सुविधाओं से 97,553 रुपए का भुगतान मिला। यह मॉडल स्वच्छता प्रबंधन और ग्रामीण आजीविका के बीच संबंध को दर्शाता है।
जल सुरक्षा में ग्राम समितियों की भूमिका
जल जीवन मिशन के तहत ग्राम पंचायतों और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों (वीडब्ल्यूएससी) या पानी समितियों को स्थानीय जल आपूर्ति प्रणालियों की योजना, कार्यान्वयन, संचालन और रखरखाव में भूमिका दी गई है। वीडब्ल्यूएससी सदस्यों का चयन ग्राम सभा के माध्यम से किया जाता है और इनमें महिलाओं का कम से कम 50% प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाता है। समितियां जल प्रणालियों के संचालन, बैंक खातों के रखरखाव, उपयोगकर्ता शुल्क, बजट और रखरखाव से जुड़े कार्यों में सहयोग करती हैं। जल जीवन मिशन के डैशबोर्ड के अनुसार देशभर में 5.33 लाख से अधिक वीडब्ल्यूएससी/पानी समितियां कार्यरत हैं।
‘नल जल मित्र’ से स्थानीय तकनीकी क्षमता
नल जल मित्र कार्यक्रम के तहत समुदाय के सदस्यों को प्लंबिंग, इलेक्ट्रिकल कार्य और पंप संचालन जैसे तकनीकी कौशल का प्रशिक्षण दिया जाता है। इससे वे स्थानीय जल आपूर्ति प्रणालियों के संचालन और छोटी-मोटी मरम्मत में सक्षम बनते हैं तथा गांवों में तकनीकी सहायता की उपलब्धता बढ़ती है।
आवास निर्माण में लाभार्थियों का सहयोग
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत आवास मित्र क्षेत्र-स्तरीय सुविधाकर्ता के रूप में लाभार्थियों की सहायता करते हैं। पात्रता और दस्तावेजीकरण से लेकर निर्माण की निगरानी तथा घर पूरा होने तक वे लाभार्थियों के साथ जुड़े रहते हैं। योजना के तहत मार्च 2029 तक 4.95 करोड़ घरों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है।
सुमति देबबर्मा का पक्के घर तक सफर
पश्चिम त्रिपुरा के मोहनपुर ब्लॉक की रंगचेरा ग्राम पंचायत की सुमति देबबर्मा पहले अपनी बेटी के साथ जर्जर कच्चे मकान में रहती थीं। कमजोर छत, मिट्टी का फर्श और नाजुक दीवारों के कारण मानसून के दौरान उनकी मुश्किलें बढ़ जाती थीं। आवास मित्र की सहायता से उन्हें पीएमएवाई-जी के तहत वित्तीय सहायता मिली और उन्होंने 2022 में अपना पक्का घर पूरा किया। निर्माण की प्रगति और जियो-टैगिंग से जुड़े प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के माध्यम से उन्हें तीन किस्तों में 1.30 लाख रुपए मिले। आवास मित्र ने दस्तावेजीकरण, निर्माण की निगरानी और ब्लॉक प्रशासन के साथ समन्वय में सहायता की। इससे उन्हें समय पर घर पूरा करने में मदद मिली।
घरेलू स्तर पर योजनाओं का अभिसरण
सामुदायिक कैडर का काम केवल किसी एक योजना तक सीमित नहीं है। उनका नेटवर्क पात्र लाभार्थियों की पहचान, दस्तावेजीकरण, सत्यापन, बैंक खाता लिंकेज और सरकारी सेवाओं तक पहुंच बनाने में सहयोग करता है। वित्तीय साक्षरता, आजीविका और उद्यम विकास में निरंतर मार्गदर्शन घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने में मदद करता है। घरेलू स्तर पर अभिसरण का उद्देश्य परिवारों को आजीविका, स्वास्थ्य, स्वच्छता और वित्तीय समावेशन जैसे विकास के कई आयामों से एक साथ जोड़ना है। आशा कार्यकर्ता स्वास्थ्य के साथ पोषण, स्वच्छता और महिलाओं से जुड़े सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता में सहयोग करती हैं। वहीं एनआरएलएम के जेंडर सीआरपी लैंगिक हिंसा, बहिष्करण और असमानता जैसे मुद्दों पर समुदायों के साथ काम करते हैं।
आरती ने सामुदायिक नेतृत्व की राह बनाई
उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले की थनवा मुडियारी ग्राम पंचायत की आरती की यात्रा सामुदायिक संस्थाओं के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं के नेतृत्व उभरने का उदाहरण है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाली आरती 2016 में स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। बाद में वह एसएचजी, ग्राम संगठन और क्लस्टर स्तरीय महासंघ में पदाधिकारी बनीं। इसके बाद वह पंचायती राज संस्थानों-समुदाय आधारित संगठनों (पीआरआई-सीबीओ) अभिसरण परियोजना के तहत अभिसरण सामुदायिक संसाधन व्यक्ति बनीं। उन्होंने ग्रामीणों को संगठित करने, साप्ताहिक बाजार की स्थापना में सहयोग देने और पंचायत, अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं तथा ग्रामीण परिवारों के बीच समन्वय मजबूत करने में भूमिका निभाई।
क्षमता निर्माण बना सतत प्रक्रिया
सामुदायिक कैडर के लिए क्षमता निर्माण अब एक बार की प्रक्रिया नहीं है। इसमें प्रेरण प्रशिक्षण, विषयगत मॉड्यूल, पुनश्चर्या पाठ्यक्रम, फील्ड सलाह और ऑन-साइट हैंडहोल्डिंग को शामिल किया गया है। एनआरएलएम के तहत कृषि सखी, पशु सखी, मत्स्य सखी और सीआरपी-ईपी जैसे विभिन्न कैडर विकसित किए गए हैं। आशा कार्यकर्ताओं के लिए वर्षभर में 23 दिनों का चरणबद्ध प्रशिक्षण, स्वच्छाग्रहियों के लिए व्यवहार परिवर्तन संबंधी प्रशिक्षण, जल समितियों और जल सखियों के लिए ग्राम जल योजना एवं जल गुणवत्ता निगरानी का प्रशिक्षण तथा आवास मित्रों के लिए लाभार्थी पहचान और निर्माण निगरानी से जुड़ा प्रशिक्षण इस निरंतर क्षमता निर्माण का हिस्सा है।
ग्रामीण परिवर्तन की रीढ़ बने जमीनी कार्यकर्ता
ग्रामीण परिवारों तक सरकारी योजनाओं और सेवाओं को प्रभावी ढंग से पहुंचाने में सामुदायिक कैडर एक महत्वपूर्ण संस्थागत कड़ी बन चुके हैं। जागरूकता, क्षमता निर्माण, सेवा सहायता, व्यवहार परिवर्तन और योजनाओं के अभिसरण के जरिए ये कार्यकर्ता सरकारी कार्यक्रमों को समुदायों की वास्तविक जरूरतों से जोड़ने में सहयोग करते हैं। ग्रामीण विकास की प्रक्रिया में इन जमीनी कार्यकर्ताओं की भूमिका आने वाले समय में भी महत्वपूर्ण बनी रहेगी। सामुदायिक संस्थाओं और अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं की क्षमता में निरंतर निवेश से ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा वितरण, आजीविका, वित्तीय समावेशन और सामाजिक विकास से जुड़े प्रयासों को और मजबूत किया जा सकता है।







