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भारत में दुनिया की दिलचस्पी अब तक के सर्वोच्च स्तर पर, फायदा उठाने के लिए कॉम्पिटिटिवनेस जरूरी: टाटा स्टील CEO


व्यापार 21 September 2026
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भारत में दुनिया की दिलचस्पी अब तक के सर्वोच्च स्तर पर, फायदा उठाने के लिए कॉम्पिटिटिवनेस जरूरी: टाटा स्टील CEO

दुनिया की भारत में दिलचस्पी पहले कभी इतनी ज्यादा नहीं रही जितनी आज है। AIMA के नेशनल मैनेजमेंट कन्वेंशन 2026 की प्लेटिनम जुबली को संबोधित करते हुए टाटा स्टील लिमिटेड के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर तथा ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन (AIMA) के प्रेसिडेंट टी.वी. नरेंद्रन ने जोर देते हुए कहा कि इस मौके का फायदा उठाने के लिए भारत को और अधिक सक्षम तथा कॉम्पिटिटिव बनना होगा।

दुनिया की नजर भारत पर: मार्केट से स्ट्रैटेजिक पार्टनर तक

नरेंद्रन ने कहा, “दुनिया बदल रही है और यह बदलाव भारत के लिए एक मौका बना रहा है, लेकिन हम उस मौके का फायदा उठा पाते हैं या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि हम कितने काबिल और कॉम्पिटिटिव बनते हैं। शायद ही कभी ऐसा समय आया हो जब दुनिया की भारत में एक मार्केट के तौर पर इतनी दिलचस्पी रही हो।” उनके अनुसार, वैश्विक स्तर पर भारत को मार्केट, मैन्युफैक्चरिंग बेस, टेक्नोलॉजी और टैलेंट के स्रोत तथा तेजी से स्ट्रैटेजिक पार्टनर के रूप में देखा जा रहा है।

ग्रोथ विद रेजिलिएंस: चुनौतियां और सबक

‘ग्रोथ विद रेजिलिएंस’ थीम पर बोलते हुए नरेंद्रन ने हाल के घटनाक्रमों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वैश्विक ट्रेडिंग फ्रेमवर्क विवादित हो गया है, जहां टैरिफ और ट्रेड बैरियर के बीच ट्रेड, इन्वेस्टमेंट, टेक्नोलॉजी, एनर्जी और सप्लाई चेन पर फोकस बना हुआ है। क्लाइमेट इवेंट्स का अंदाजा लगाना मुश्किल है। जियोपॉलिटिकल घटनाक्रम सालों से बनी बिजनेस प्लानिंग को बदल सकते हैं। टेक्नोलॉजी इतनी तेजी से आगे बढ़ रही है कि कई स्किल्स और बिजनेस मॉडल जल्दी ही अप्रासंगिक हो सकते हैं। उन्होंने वेस्ट एशिया के संघर्ष का उदाहरण देते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले शिपिंग रूट प्रभावित होने से एनर्जी की लागत, फ्रेट रेट और इंश्योरेंस प्रीमियम बढ़ गए, जिसका सीधा असर भारत में बिजनेस करने की लागत पर पड़ता है। नेपाल में हाल की विनाशकारी बाढ़ जैसी आपदाएं भी ज्ञात जोखिमों से आगे बढ़कर तैयारी करने की जरूरत को रेखांकित करती हैं।

अर्थव्यवस्था मजबूत, लेकिन रेजिलिएंस पर जोर

इन चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने अप्रैल-जून तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। इसमें इन्वेस्टमेंट में 11.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और मैन्युफैक्चरिंग तथा सर्विस सेक्टर का मजबूत योगदान रहा। नरेंद्रन ने कहा कि पिछले कुछ दशकों में कंपनियां दक्षता के लिए बिजनेस को ऑप्टिमाइज करने में माहिर हो गईं—ग्लोबल सप्लाई चेन बनाईं, इन्वेंट्री कम की और सबसे सस्ती जगहों से सोर्सिंग की। लेकिन आज सवाल सिर्फ दक्षता का नहीं, बल्कि यह भी है कि अगर हालात बदलें तो क्या होगा। सामान कहां से लाएंगे, कितनी जल्दी विकल्प ढूंढ सकेंगे, टेक्नोलॉजी पर कितना नियंत्रण है और एनर्जी कीमतों या ट्रेड बैरियर बदलने पर मुकाबला कर पाएंगे या नहीं।  उन्होंने कहा, “यहीं पर मज़बूती (resilience) की बातचीत कॉम्पिटिटिवनेस (competitiveness) की बातचीत बन जाती है।”

मैन्युफैक्चरिंग में डिजाइन और आईपी पर फोकस जरूरी

मैन्युफैक्चरिंग पर जोर देते हुए नरेंद्रन ने बताया कि ग्लोबल कंपनियां लागत, क्वालिटी, लॉजिस्टिक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और बड़े पैमाने पर डिलीवरी देखती हैं। फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से मार्केट एक्सेस तो मिलती है, लेकिन लंबे समय का फायदा घरेलू स्तर पर काम कैसे किया जाता है, इस पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा, “किसी प्रोडक्ट को असेंबल करने और उस प्रोडक्ट को डिजाइन तथा इंजीनियर करने के बीच काफी फर्क है।” भारत को अलग-अलग सेक्टर में अपना खुद का डिजाइन, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी और टेक्निकल टैलेंट विकसित करना होगा। टाटा स्टील CEO के इन विचारों ने उद्योग जगत में रेजिलिएंस और कॉम्पिटिटिवनेस को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।

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