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जनजातीय विकास योजनाओं की समीक्षा, पीएम-जनमन और डीए-जेजीयूए के तहत कार्यान्वयन में तेजी पर जोर


देश 04 September 2026
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जनजातीय विकास योजनाओं की समीक्षा, पीएम-जनमन और डीए-जेजीयूए के तहत कार्यान्वयन में तेजी पर जोर

जनजातीय कार्य मंत्रालय ने पीएम-जनमन और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीए-जेजीयूए) समेत प्रमुख जनजातीय विकास योजनाओं की प्रगति की व्यापक समीक्षा की है। 3 सितंबर 2026 को मंत्रालय की सचिव रंजना चोपड़ा की अध्यक्षता में हुई बैठक में योजनाओं के भौतिक और वित्तीय प्रदर्शन, फंड के इस्तेमाल, राज्यों और कार्यान्वयन एजेंसियों के बीच समन्वय तथा जमीनी स्तर पर सामने आ रही चुनौतियों पर चर्चा हुई। बैठक में जनजातीय विकास को मजबूत करने के लिए आईटीडीए रोडमैप, आदि दर्पण और जिला कृषि डीपीआर चैलेंज समेत कई प्रमुख पहलों की घोषणा की गई।

आईटीडीए के लिए रोडमैप और दिशानिर्देश जारी

बैठक में एकीकृत जनजातीय विकास एजेंसियों/परियोजनाओं (आईटीडीए/आईटीडीपी) के लिए व्यापक परिचालन दिशानिर्देशों के साथ रोडमैप राज्यों और संबंधित मंत्रालयों के साथ साझा किया गया। इसमें आईटीडीए/आईटीडीपी की योजना, संचालन और निगरानी के लिए संरचित ढांचा तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य जिला और ब्लॉक स्तर पर केंद्र तथा राज्य सरकार के हस्तक्षेपों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। मंत्रालय को उम्मीद है कि इससे विकेंद्रीकृत योजना को मजबूती मिलेगी, फंड का बेहतर इस्तेमाल होगा और कार्यान्वयन में होने वाली देरी कम होगी।

आदि दर्पण का किया गया विमोचन

बैठक के दौरान ‘आदि दर्पण’ का भी विमोचन किया गया। यह संकलन मंत्रालय की योजनाओं और कार्यक्रमों की प्रगति के साथ देशभर के जनजातीय समुदायों की जमीनी स्थिति और विकास संबंधी उपलब्धियों को सामने रखता है। ‘आदि दर्पण’ को जनजातीय विकास से जुड़ी जानकारी के त्वरित संदर्भ के रूप में तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाने, साक्ष्य आधारित योजना को आसान बनाने और नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं तथा नागरिकों को योजनाओं के क्रियान्वयन और उनके परिणामों की बेहतर जानकारी उपलब्ध कराना है।

जिला कृषि डीपीआर चैलेंज के विजेताओं की घोषणा

बैठक में जिला कृषि विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) चैलेंज के विजेता जिलों की भी घोषणा की गई। इस चुनौती के तहत जिलों को जनजातीय किसानों के लिए कृषि और संबद्ध आजीविका से जुड़े हस्तक्षेपों पर उच्च गुणवत्ता वाली और लागू करने योग्य डीपीआर तैयार करने के लिए आमंत्रित किया गया था। इस पहल का उद्देश्य बागवानी, जल प्रबंधन और मूल्य शृंखला विकास जैसे क्षेत्रों में कृषि-आजीविका नियोजन को मजबूत करना और नए प्रयोगों को बढ़ावा देना है। विजेता जिलों में केरल के वायनाड और पलक्कड़, असम का दीमा हसाओ तथा महाराष्ट्र का पालघर शामिल हैं।

आदिवासी महिला उद्यमियों पर राष्ट्रीय सम्मेलन

बैठक में आगामी रानी दुर्गावती आदिवासी महिला सम्मेलन की तैयारियों की जानकारी भी दी गई। डीए-जेजीयूए निदेशक डॉ. वर्नाली डेका ने सम्मेलन से जुड़ी जानकारी साझा की। प्रसिद्ध आदिवासी योद्धा रानी दुर्गावती के नाम पर आयोजित होने वाले इस राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्देश्य आदिवासी महिला उद्यमियों के लिए बाजार संपर्क, ऋण तक पहुंच, कौशल विकास और मार्गदर्शन के अवसरों को मजबूत करना है। मंत्रालय के अनुसार, इससे जनजातीय क्षेत्रों में महिला नेतृत्व वाले उद्यमों को बढ़ावा देने और आर्थिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

पीएम-जनमन और डीए-जेजीयूए की घटकवार समीक्षा

समीक्षा बैठक में पीएम-जनमन और डीए-जेजीयूए के तहत विभिन्न घटकों की प्रगति का विस्तृत विश्लेषण किया गया। इसमें भौतिक और वित्तीय उपलब्धियों के साथ संबंधित मंत्रालयों के साथ समन्वय तथा कार्यान्वयन में आने वाली प्रमुख चुनौतियों की समीक्षा की गई। डीए-जेजीयूए, पीएम-जनमन और संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत उपयोगिता प्रमाणपत्रों (यूसी) तथा खर्च संबंधी प्रतिबद्धताओं की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया गया। मंत्रालय ने वित्तीय वर्ष की शेष अवधि में उपलब्ध फंड के इस्तेमाल में तेजी लाने पर जोर दिया।

स्वास्थ्य और जैवसंसाधन पहलों की भी समीक्षा

बैठक में टीएमएमसी पहल, सिकल सेल रोग के लिए सक्षमता केंद्र और सीएसआईआर-एनबीआरआई जैवसंसाधन पहल की प्रगति का भी आकलन किया गया। इन पहलों का उद्देश्य जनजातीय समुदायों के लिए स्वास्थ्य संबंधी हस्तक्षेपों को मजबूत करने के साथ पारंपरिक ज्ञान और जैवसंसाधनों का विकासात्मक उपयोग बढ़ाना है।

आदि कर्मयोगी अभियान पर भी चर्चा

समीक्षा के दौरान आदि कर्मयोगी अभियान के कार्यान्वयन की स्थिति पर भी चर्चा हुई। इसमें आदि सेवा केंद्रों में पंजीकरण और आदि कर्मयोगी स्वयंसेवकों के नामांकन की प्रगति शामिल थी। स्वयंसेवकों की क्षमता निर्माण के लिए विकसित आईगोट माइक्रोसाइट का प्रदर्शन भी किया गया। इसके जरिए प्रशिक्षित, जवाबदेह और सेवा-उन्मुख जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है।

राज्यों और एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर

बैठक में कार्यान्वयन तंत्र को मजबूत करने, विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय सुधारने और फंड के इस्तेमाल में तेजी लाने के लिए स्पष्ट कार्य बिंदुओं की पहचान की गई। मंत्रालय ने योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं को दूर करने और राज्यों तथा कार्यान्वयन एजेंसियों के साथ बेहतर तालमेल स्थापित करने पर जोर दिया।

परिणाम आधारित जनजातीय विकास पर फोकस

समीक्षा बैठक के निष्कर्षों में मंत्रालय ने अपनी प्रमुख योजनाओं के तहत परिणामों की प्राप्ति में तेजी लाने की प्रतिबद्धता दोहराई। मंत्रालय का जोर ऐसी योजनाओं और पहलों पर है, जिनका जमीनी स्तर पर जनजातीय समुदायों के जीवन, आजीविका और आर्थिक अवसरों पर ठोस प्रभाव दिखाई दे। यह प्रयास विकसित भारत की परिकल्पना के अनुरूप प्रभावी, जवाबदेह और परिणामोन्मुखी जनजातीय विकास को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 

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