रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज दुशांबे में दक्षिण अफ्रीकी संघ के राष्ट्राध्यक्षों की बैठक के दौरान ताजिकिस्तान के प्रधानमंत्री क़ोहिर रसूलज़ोदा से मुलाकात की। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में सिंह ने कहा कि इस मुलाकात से भारत और ताजिकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे सभ्यतागत संबंधों और गहरे जन-संबंधों पर बल मिला। रक्षा मंत्री ने ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ से भी मुलाकात की।
भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दुशांबे में ताजिकिस्तान के प्रधानमंत्री क़ोहिर रसूलज़ोदा से मुलाकात की। यह मुलाकात अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने और मित्र देशों के साथ सहयोग को आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सोशल मीडिया पर साझा की गई एक पोस्ट में राजनाथ सिंह ने इस मुलाकात को भारत और ताजिकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे सभ्यतागत संबंधों तथा दोनों देशों के लोगों के बीच गहरे जुड़ाव को रेखांकित करने वाला बताया। भारत और ताजिकिस्तान के संबंध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक महत्व रखते हैं। दोनों देशों के बीच सदियों पुराने संपर्क रहे हैं, जिनमें व्यापार, संस्कृति और लोगों के आपसी मेलजोल की अहम भूमिका रही है।
रक्षा मंत्री की इस मुलाकात को भारत और ताजिकिस्तान के बीच आपसी विश्वास, मित्रता और सहयोग को नई मजबूती देने के प्रयास के रूप में देखा जा सकता है। मध्य एशिया में स्थित ताजिकिस्तान भारत के लिए रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। क्षेत्रीय स्थिरता, सुरक्षा और आतंकवाद से निपटने जैसे विषय दोनों देशों के साझा हितों से जुड़े हुए हैं। ऐसे में दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच संपर्क क्षेत्रीय चुनौतियों पर विचार-विमर्श और सहयोग की संभावनाओं को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है।
राजनाथ सिंह ने ताजिकिस्तान के प्रधानमंत्री से मुलाकात के अलावा ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ से भी बातचीत की। यह संपर्क भारत के पश्चिम और मध्य एशिया के देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने की व्यापक कूटनीतिक कोशिशों के संदर्भ में अहम है। भारत और ईरान के बीच ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार, संपर्क मार्गों और क्षेत्रीय सहयोग से जुड़े विषय लंबे समय से द्विपक्षीय संबंधों का हिस्सा रहे हैं। विशेष रूप से चाबहार बंदरगाह भारत के लिए क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने और अफगानिस्तान तथा मध्य एशिया तक पहुंच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।
दुशांबे में हुई इन मुलाकातों के माध्यम से भारत ने मित्र देशों के साथ संवाद और पारस्परिक सहयोग के महत्व को रेखांकित किया है। मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में विभिन्न देशों के बीच नियमित बातचीत क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और साझा हितों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। रक्षा मंत्री की इन बैठकों से भारत के कूटनीतिक संपर्कों को मजबूती देने का संदेश भी मिलता है।
हालांकि, इन मुलाकातों के दौरान किन विशिष्ट मुद्दों पर सहमति बनी या किसी नए समझौते पर चर्चा हुई, इसकी विस्तृत जानकारी सामने आना आवश्यक है। फिलहाल राजनाथ सिंह की सोशल मीडिया पोस्ट में भारत और ताजिकिस्तान के बीच पुराने सभ्यतागत संबंधों तथा मजबूत जन-संपर्कों को विशेष रूप से रेखांकित किया गया है। ये मुलाकातें भारत की क्षेत्रीय साझेदारियों और मित्र देशों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखने की नीति को दर्शाती हैं







